भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बिना शोर शराबे के इतना बड़ा परिवर्तन किया और उसे इतने सहज तरीके से स्वीकार कर लिया गया, जो भाजपा का अलग और विशिष्ठ चरित्र दिखाता है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ साथ देश के समस्त कार्यकर्ताओं, नेताओं ने भी स्वाभाविक रूप से स्वीकार किया है।
दुनिया के नव वर्ष में प्रवेश करने से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के स्तर पर नई सुबह का आगाज कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा ऐसी दूरदृष्टि वाले निर्णय करती है, जिसके बारे में आमतौर पर पार्टियां सोच भी नहीं पाती हैं। नितिन नबीन का भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनना इसी प्रकार का एक निर्णय है। अब नया साल भारतीय जनता पार्टी के संगठन को नया रूप देने वाला होगा। कह सकते हैं कि अगला वर्ष संगठन के कायाकल्प का हो सकता है। याद करें कि पिछले साल इन्हीं दिनों कांग्रेस पार्टी का एक अधिवेशन कर्नाटक के बेलगावी में हुआ था, जहां पार्टी के नेताओं ने कहा था कि अगला वर्ष यानी 2025 का वर्ष संगठन का होगा। लेकिन पूरे साल कांग्रेस ने संगठन का कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसे याद किया जा सके।
परंतु भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बिना शोर शराबे के इतना बड़ा परिवर्तन किया और उसे इतने सहज तरीके से स्वीकार कर लिया गया, जो भाजपा का अलग और विशिष्ठ चरित्र दिखाता है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ साथ देश के समस्त कार्यकर्ताओं, नेताओं ने भी स्वाभाविक रूप से स्वीकार किया है। चाहे भाजपा के केंद्रीय मंत्री हों या मुख्यमंत्री या साधारण कार्यकर्ता के लिए नितिन नबीन आदरणीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं। अब यही पर भाजपा और कांग्रेस के अंतर के बारे में सोचें। मल्लिकार्जुन खड़गे तीन साल से कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। लेकिन पार्टी के नेता उनको अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार नहीं करते। परिवार के बाहर के जो भी अध्यक्ष हुए उनके साथ ऐसा ही हुआ। पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री थे और कांग्रेस अध्यक्ष भी थे तब भी उनकी शिकायत थी कि कांग्रेस वाले उनको नेता नहीं मानते हैं। परिवार के बाहर से दूसरे अध्यक्ष सीताराम केसरी थे और उनके साथ किस तरह का बरताव हुआ और कैसे उनको खींच कर पार्टी कार्यालय से निकाल दिया गया वह कहानी देश को पता है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस का चरित्र दिखाने के लिए कई बार वह कहानी मंचों से सुनाई है।
भाजपा और कांग्रेस के चरित्र में यह बड़ा अंतर है और नितिन नबीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से यह अंतर ज्यादा प्रत्यक्ष रूप से लोगों के सामने आया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस प्रस्थापना को मजबूत किया है कि भाजपा में कोई भी नेता शीर्ष तक पहुंच सकता है। पार्टी का साधारण कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है और उसे उतने ही सम्मान के साथ स्वीकार भी किया जाएगा। नितिन नबीन जब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने और पहली बार दिल्ली आए तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित पार्टी मुख्यालय की सीढ़ियों पर स्वंय अमित शाह और जेपी नड्डा ने उनका स्वागत किया। भाजपा के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उम्र और अनुभव में अपने से बहुत छोटे नितिन नबीन को पूरे सम्मान के साथ कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया और देश भर के भाजपा कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन की शक्ति नितिन नबीन में समाहित की जा रही है।
भारतीय जनता पार्टी की समूची दूसरी पीढ़ी ने नितिन नबीन का स्वागत और सम्मान किया। पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े ने उनको हवाईअड्डे पर रिसीव किया तो केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी मुख्यालय में स्वागत किया। इस तरह संगठन में नेतृत्व का पीढ़ीगत परिवर्तन संपन्न हुआ। भाजपा के संगठन का जो ढांचा है वह इतना अद्भुत है कि देख कर लगता है कि कितने सुनियोजित तरीके से इसे व्यवस्थित किया गया है। संगठन में पहली पीढ़ी के जो नेता हैं नितिन नबीन ने स्वंय जाकर सबसे मुलाकात की। वे राजनाथ सिंह से मिले, नितिन गडकरी से मिले और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे से लौट कर आए तो उनसे मिलने गए। उन्होंने दो बुजुर्ग नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का भी आशीर्वाद लिया। भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेताओं ने पार्टी मुख्यालय में उनका स्वागत किया और उनको संगठन के दूसरे सर्वोच्च पद पर आसीन कराया। और इस तरह भाजपा की तीसरी पीढ़ी ने दो पीढ़ी के अनुभवी नेताओं के संरक्षण में संगठन की कमान संभाल ली। अब यह तय मानना चाहिए कि भाजपा के अंदर व्यापक पीढ़ीगत परिवर्तन होंगे, जैसे 2014 में अमित शाह के आने के बाद हुए थे। उस समय जो नेता आगे आए और संगठन में अलग अलग जिम्मेदारी संभाली वे सभी लोग सरकार व संगठन की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पीछे की नई पीढ़ी तैयार की जाएगी, जिसका आरंभ नितिन नबीन से हुआ है।
बहुत से लोगों के लिए हैरानी की बात थी कि नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन क्या ऐसा ही आश्चर्य तब नहीं हुआ था, जब नितिन गडकरी को महाराष्ट्र से दिल्ली लाया गया था? वे भी महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य थे और बहुत पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे थे। तब भी यही सोचा जा रहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर यानी दिल्ली में सक्रिय किसी नेता को पार्टी का उत्तरदायित्व दिया जाएगा। परंतु ऐसा नहीं हुआ। यह भी एक गलतफहमी है कि राष्ट्रीय नेता का मतलब उससे है, जो दिल्ली में सक्रिय है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी हमेशा इस गलतफहमी को दूर करने का प्रयास करते हैं कि सिर्फ लुटियन दिल्ली की राजनीति करने वाला राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं होता। पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष वह भी हो सकता है, जो मुंबई में राजनीति करता हो या पटना में राजनीति करता हो। महाराष्ट्र वालों को भी बड़ी हैरानी हुई होगी, जब नितिन गडकरी अध्यक्ष हुए या हिमाचल प्रदेश के लोगों को जेपी नड्डा के अध्यक्ष बनने पर आश्चर्य हुआ होगा। वैसा ही आश्चर्य बिहार के लोगों या थोड़े से ऐसे लोगों को हो रहा है, जो मानते हैं कि जिसने लुटियन दिल्ली की राजनीति नहीं की वह कैसे राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकता है। इनके अलावा पूरे देश के भाजपा कार्यकर्ता और सामान्य राजनीतिक समझ रखने वाले लोगों के बीच यह संदेश गया है कि भाजपा में शीर्ष पद किसी व्यक्ति या परिवार के लिए आरक्षित नहीं है। पार्टी का कोई साधारण कार्यकर्ता भी उस पद तक पहुंच सकता है। ध्यान रहे देश के नागरिक चाहे वे भाजपा के समर्थक हों या नहीं हों, वे इस परिवर्तन को देख रहे हैं और साथ ही कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेताओं को भी देख रहे हैं। उनको भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता का शीर्ष पद तक पहुंचना और वंशवादी राजनीति के शहजादों का फर्क भी दिख रहा है।
बहरहाल, भाजपा में जो प्रयोग संगठन के स्तर पर हुआ है या आगे होगा उसी तरह के प्रयोग सरकार में भी हो रहे हैं। आज भाजपा के ज्यादातर मुख्यमंत्री 50 साल की उम्र के आसपास वाले हैं। इसका अर्थ है कि आने वाले 20 वर्षों के लिए प्रदेशों में नेतृत्व तैयार किया गया है। नए साल के आरंभ में भारतीय जनता पार्टी के संगठन को नया स्वरूप मिल सकता है। उसमें यह दिखाई देगा कि अगले 20 साल तक संगठन का चेहरा कैसा रहने वाला है। नितिन नबीन के साथ युवा और ऊर्जावान नेताओं की टीम बन सकती है। यह टीम राज्यों में परिश्रम करने वाले और विचारधारा के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं की होगा। भाजपा के इन प्रयोगों से दूरदराज के क्षेत्रों में पार्टी के लिए कार्य करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल बढ़ता है। वे ज्यादा मेहनत करते हैं क्योंकि उनको लगता है कि संगठन और सरकार में शीर्ष पद चंद व्यक्तियों या परिवारों के लिए आरक्षित नहीं हैं। भाजपा की विरोधी पार्टियां यही पर मात खाती हैं। उनके लिए राजनीति का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना होता है। वे चुनाव के समय सक्रिय होते हैं, जबकि भाजपा के लिए राजनीति समाज सेवा का माध्यम है और सतत चलने वाली प्रक्रिया है। तभी संगठन को मजबूत करने का प्रयास निरंतर चलता रहता है। नितिन नबीन का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनना इसी विचार की निरंतरता का प्रतीक है।
(लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)
