विवाद के बीच टाटा ट्रस्ट के बोर्ड की बैठक आज

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टाटा ट्रस्ट के निदेशकों की बैठक शुक्रवार को प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब टाटा ग्रुप पर कंट्रोल को लेकर टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की बीच विवाद चल रहा है, जिसमें सरकार ने भी दखल दिया है। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई।

यह बैठक बुधवार को सरकार की मध्यस्थता में हुई चर्चा के बाद हो रही है, जिसमें अधिकारियों ने कथित तौर पर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस प्राइवेट (टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी) के प्रतिनिधियों से अपने मतभेदों को सुलझाने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि समूह का संचालन अप्रभावित रहे।

कथित तौर पर यह विवाद तब शुरू हुई जब कुछ ट्रस्टियों ने पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को टाटा संस बोर्ड से नामित निदेशक के रूप में हटा दिया और एक अन्य निदेशक वेणु श्रीनिवासन को हटाने का प्रयास किया।

दोनों को नोएल टाटा का करीबी बताया जाता है, जो वर्तमान में टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं।

टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिससे उसे कंपनी के एक तिहाई बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति करने और महत्वपूर्ण निर्णयों पर वीटो लगाने का अधिकार प्राप्त है।

रिपोर्ट्स में बताया गया कि बोर्ड में मतभेद का एक बड़ा मुद्दा टाटा संस की संभावित लिस्टिंग है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने पहले टाटा संस को एक “अपर-लेयर” गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके कारण टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करना अनिवार्य हो गया था। 

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टाटा ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों को डर है कि इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) उनकी वीटो शक्ति को कमजोर कर सकता है और कंपनी को अधिग्रहण के जोखिमों और सख्त प्रशासनिक नियमों के दायरे में ला सकता है।

टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की चिंता का एक और विषय ‘मैजोरिटी ऑफ माइनॉरिटी’ का वोटिंग पॉविजन है, जिससे टाटा संस में 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पल्लोनजी (एसपी) ग्रुप का प्रभाव बढ़ सकता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, इससे बड़े फैसले लेने की क्षमता टाटा ट्रस्ट से हटकर टाटा संस के बोर्ड और सार्वजनिक निवेशकों के पास चली जाएगी।

हालांकि, इस मुद्दे का जल्द ही कोई निष्कर्ष निकलने की संभावना नहीं है। टाटा संस को कथित तौर पर इस साल के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक से नए दिशानिर्देश मिलने की उम्मीद है, जिससे कंपनी लिस्टिंग की अनिवार्यता से आवश्यक से छूट मिल सकती है।

टाटा संस के अध्यक्ष नटराजन चंद्रशेखरन को ट्रस्टियों ने शापूरजी पलोनजी समूह के साथ होल्डिंग कंपनी से शांतिपूर्ण तरीके से बाहर निकलने के लिए बातचीत शुरू करने के लिए कहा है।

एसपी समूह कर्ज कम करने के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहा है, लेकिन उसे खरीदार ढूंढने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एसपी समूह कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें टाटा संस द्वारा अपने कुछ या सभी शेयर खरीदना भी शामिल है।

समूह किसी भी संभावित बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर ब्रांच के कर्ज को चुकाने के लिए करने की योजना बना रहा है, जिससे उसे उधारी लागत कम करने और अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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