सिद्धरमैया की कुर्सी सुरक्षित हो गई

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चुनाव पांच राज्यों में हुए थे लेकिन इन चुनावों से कर्नाटक की राजनीति भी जुड़ी हुई थी। डीके शिवकुमार को असम में जिम्मेदारी मिली थी और कहा जा रहा था कि अगर असम में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करेगी तो शिवकुमार का कद बढ़ेगा और वे कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने की ओर एक कदम और आगे बढ़ेंगे। लेकिन कांग्रेस का असम में बहुत खराब प्रदर्शन हुआ। इसलिए शिवकुमार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। दूसरी खास बात यह है कि कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। भाजपा ने इन सीटों पर पूरा जोर लगाया था। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन सीटों के चुनाव से अपनी प्रतिष्ठा जोड़ी थी।

आमतौर पर उपचुनावों में मुख्यमंत्री प्रचार नहीं करते हें लेकिन दो सीटों के उपचुनाव में सिद्धारमैया ने जम कर प्रचार किया। कांग्रेस दोनों सीटों पर जीत गई। बागलकोट सीट पर कांग्रेस के उमेश हलप्पा मेती और दावणगेरे दक्षिण सीट पर समर्थ समानुर मल्लिकार्जुन चुनाव जीत गए। दोनों सीटें पहले भी कांग्रेस के पास ही थी। इसलिए भी कांग्रेस के ऊपर ज्यादा दबाव था कि वह सीट बचाए। अगर एक भी सीट जाती तो सिद्धारमैया के खिलाफ जनादेश माना जाता और तब डीके शिवकुमार के समर्थक उनको हटाने की मांग तेज करते। लेकिन असम में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और कर्नाटक की दोनों सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव में कांग्रेस की जीत से मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया की कुर्सी सुरक्षित हो गई दिख रही है।


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