महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अब एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हो गई हैं। सवाल है कि अब आगे क्या होगा? आगे सबसे अहम काम जो होना था वह पार्टी के विलय का है। शरद पवार का खेमा विलय करने के लिए तैयार है। लेकिन जयंत पाटिल के साथ कई बार की बातचीत में जो सहमति बनी थी उसी सहमति पर विलय हो सकता है? उस समय शरद पवार, उनकी बेटी सुप्रिया सुले और बाकी सारे नेता इस बात के लिए तैयार थे कि अजित पवार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहें और शऱद पवार संयोजक या संरक्षण की भूमिका निभाएं। लेकिन क्या यही फॉर्मूला सुनेत्रा पवार के साथ चलेगा? ध्यान रहे प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और काम चल रहा था लेकिन आननफानन में सुनेत्रा पवार का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह दिखता है कि वे पार्टी पर पूरा कंट्रोल रखना चाहती हैं।
इस बीच राज्यसभा के लिए उम्मीदवार भी तय करना है। एनसीपी की ओर से पार्थ पवार को राज्यसभा भेजा जाएगा। सुनेत्रा पवार जब इस्तीफा देंगी और उनकी सीट पर उपचुनाव होगा तब बचे हुए चार साल के कार्यकाल के लिए कौन जाएगा यह फैसला होगा। दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी ने भी लगभग पल्ला झाड़ लिया और शरद पवार को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं है। उद्धव ठाकरे की शिव सेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से मौका मिल सकता है। पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि शरद पवार अपने 50 साल से ज्यादा लंबे राजनीतिक करियर में किसी भी सदन के सदस्य नहीं होंगे। यह स्थिति उनकी और उनकी पार्टी की राजनीति को प्रभावित करेगी। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा अपने गठबंधन की ओ से सभी सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयार कर रही है। इसका अर्थ है कि वह शरद पवार के 10 विधायकों को अपनी ओर गिन रही है। अगर ऐसा होता है तो राज्यसभा चुनाव दिलचस्प होगा।
