केरल का नाम केरलम किए जाने के बाद फिर से कई राज्यों में नाम बदलने की मांग शुरू हो गई है। कई राज्यों में पहले से मांग चल रही है उसे फिर से उभारा गया है। गौरतलब है कि इस सदी के पहले 25 साल में चार नए राज्य बने और दो राज्यों के नाम बदले गए। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तरांचल का गठन हुआ था। सात साल के बाद उत्तरांचल का नाम बदल कर उत्तराखंड किया गया। इसी तरह 2011 में उड़ीसा का नाम बदल कर ओड़िशा किया गया। अलग झारखंड आंदोलन के समय इसका नाम वनांचल रखने की मांग होती थी। लेकिन शिबू सोरेन की पार्टी जेएमएम शुरू से ही झारखंड नाम के समर्थन में थी।
बहरहाल, अब दिल्ली में नाम बदलने की मांग उठी है। दिल्ली के कई नेता इसका नाम बदल कर इंद्रप्रस्थ करने की मांग कर रहे हैं। ध्यान रहे इंद्रप्रस्थ, हस्तिनापुर जैसे कई नाम दिल्ली के रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने एक बार फिर नाम बदलने की मांग शुरू की है। उनका कहना है कि अंग्रेजी में पश्चिम बंगाल का नाम डब्लु से शुरू होता है इसलिए उनका राज्य हर सरकारी काम में सबसे नीचे स्थान पाता है। उन्होंने पहले बंगाल, बेंगॉल, बांग्ला जैसे नामों का सुझाव केंद्र को भेजा था। वे चाहती हैं कि बांग्ला नाम हो। लेकिन यह भाषा का नाम है और बांग्लादेश से मिलता जुलता है। जो हो उनकी पार्टी यह भी चाहती है कि पश्चिम हट जाए और सीधे बंगाल नाम रख दिया जाए। उधऱ बिहार में राज्य का नाम बदलने की मांग तो नहीं हो रही है लेकिन राजधानी पटना का नाम बदल कर पाटलिपुत्र करने की मांग कई नेता कर रहे हैं।
