असम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे भूपेन बोरा का पार्टी छोड़ना पहले से तय था। पहले से ही यह भी तय था कि वे भारतीय जनता पार्टी में जाएंगे। अब खबर आ गई है कि वे 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी तस्वीरें भी आ गई हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी थी। गौरव गोगोई और जितेंद्र सिंह दोनों जान रहे थे। फिर भी जब बोरा ने इस्तीफा दिया तो उन्होंने उनको मनाने की कोशिश की और इतना ही नहीं राहुल गांधी से भी उनको फोन कराया गया। राहुल गांधी ने करीब 15 मिनट तक उनसे फोन पर बात की। इसके बाद बोरा ने 24 घंटे में सोच कर बताने की बात कही। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि सब जानते हुए राहुल गांधी से इसलिए फोन कराया गया ताकि बाद में बोरा यह नहीं कह सकें कि उनसे किसी ने बात नहीं की।
ध्यान रहे हिमंत बिस्वा सरमा ने पार्टी छोड़ने के बाद यही कहा था कि वे राहुल गांधी से मिलने गए थे तो तीन मिनट की मुलाकात में राहुल अपने कुत्ते को बिस्किट खिलाते रहे। सरमा का यह भी कहना है कि सोनिया गांधी उनको सीएम बनाने को तैयार थीं लेकिन राहुल ने वीटो करके रूकवाया। बहरहाल, राहुल ने सरमा वाली गलती बोरा के मामले में नहीं की। असल में कांग्रेस चाहती है कि इस बार असमिया मूल के लोग और मुस्लिम उसके साथ रहें। इसलिए उसने अखिल गोगोई और लुरिनजोत गोगोई से तालमेल किया है। गौरव गोगोई ओहम पहचान की राजनीति का प्रतिनिधि चेहरा हैं।
लेकिन दूसरी ओर भाजपा ने सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण को राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बनाया है। भूपेन बोरा भी इसमें काम आएंगे। उन्होंने अपना काम शुरू भी कर दिया है। बोरा ने कहा है कि असम कांग्रेस का कार्यालय अब धुबरी के सांसद रकीबुल हसन के घर शिफ्ट हो गया है। उन्होंने कहा है कि असम कांग्रेस अब एपीसीसी रकीबुल बन गई है। इस तरह सरमा कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के जो आरोप लगाते रहते हैं बोरा ने उसकी पुष्टि की है। आगे वे इस तरह के और काम करेंगे।
