बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के करीब दो महीने बाद प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव को ध्यान आया है कि चुनाव नतीजों पर सवाल उठाना है। दो महीने तक दोनों चुप रहे। दोनों पार्टियों की ओर से किसी सीट पर चुनाव नतीजे को लेकर चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं की गई। अदालत में भी कोई याचिका नहीं दायर की गई। लेकिन अब बिहार विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाषण दिया और कहा कि बिहार चुनाव में लोक हार गया है और तंत्र की जीत हुई है। इसी तरह प्रशांत किशोर की पार्टी ने तो सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी और चुनाव नतीजे को चुनौती दे दी। उनकी पार्टी ने कहा कि चुनाव से पहले नकद पैसे बांट कर चुनाव को प्रभावित किया गया इसलिए चुनाव को रद्द किया जाए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए उनको बहुत फटकार लगाई और कहा कि आप चुनाव बुरी तरह से हार गए तो अब इस तरह की याचिका लेकर आए हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि आपको कितने वोट मिले। ध्यान रहे प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को साढ़े तीन फीसदी के करीब वोट मिले। सवाल है अब प्रशांत किशोर और तेजस्वी को ऐसा करने की क्या जरुरत थी? तेजस्वी की पार्टी के सांसदों ने दिल्ली में अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि इस समय इसकी जरुरत नहीं है लेकिन उनका कहना है कि तेजस्वी नए सिरे से पार्टी संगठन को खड़ा करने के लिए निकलने वाले हैं। वे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं तो उनको भी अपने लोगों को मैसेज देना है कि उनके नेतृत्व पार्टी अपनी कमजोरी से नहीं हारी, बल्कि शासन ने अपनी ताकत दिखा कर चुनाव जीता। यही काम प्रशांत किशोर भी कर रहे हैं। वे इसी महीने फिर से बिहार की यात्रा पर निकलने वाले हैं तो उससे पहले उन्होंने चुनाव नतीजों पर सवाल उठाया ताकि अपने कैडर में जोश भर सकें।
