ममता बनर्जी क्या अब भी अकेले चलेंगी?

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संसद के बजट सत्र में विपक्षी पार्टियों के बीच कमाल की एकजुटता बनी है। विपक्ष की ज्यादातर पार्टियां राहुल गांधी के साथ खड़ी हैं और उनके उठाए एजेंडे का समर्थन कर रही हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अब भी अलग मुद्दा उठाए हुए हैं। इसका तात्कालिक कारण यह है कि ममता बनर्जी दिल्ली पहुंच गईं। दो फरवरी को उनको चुनाव आयोग से मिलना था, जहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को खूब हमला किया। अगले दिन तीन फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भी सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। ममता बनर्जी की पार्टी चाहती है कि सरकार के खिलाफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को मुद्दा बनाया जाए। उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के जरिए लाखों जेनुइन मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। दूसरी ओर राहुल गांधी ने इस मसले पर चुप्पी साधी है। ध्यान रहे सबसे पहले एसआईआर के खिलाफ राहुल ही सड़क पर उतरे थे, जब उन्होंने बिहार में 15 दिन की यात्रा की थी।

अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी दोनों एसआईआर पर चुप हैं। कांग्रेस को पता है कि पश्चिम बंगाल में उसका बहुत कुछ दांव पर नहीं है। इसलिए उसके नेता तृणमूल कांग्रेस के साथ मिल कर एसआईआर का मुद्दा नहीं उठा रहे हें। कांग्रेस के एक जानकार नेता कहना है कि ममता बनर्जी जान बूझकर राहुल गांधी की अनदेखी करती हैं। राहुल जो मुद्दे उठाते हैं उस पर वे चुप रह जाती हैं। उनकी पार्टी अब खुल कर कांग्रेस के एजेंडे का समर्थन नहीं कर रही है। इसके साथ ही बंगाल के बाहर दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए ममता बनर्जी काम करती हैं। असम और केरल में भी उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला है। तभी कांग्रेस चुप है। अब तृणमूल के नेता बेचैन हैं कि किसी तरह से कम से कम संसद सत्र के दौरान कांग्रेस को तैयार किया जाए कि वह एसआईआर के मुद्दे पर बोले। यह तभी होगा, जब ममता बनर्जी कांग्रेस और राहुल के एजेंडे का समर्थन करेंगी।


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