यह कोई साजिश थ्योरी या हेडलाइन मैनेजमेंट की बात नहीं है लेकिन क्या सुखद संयोग है कि उधर अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इधऱ भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करने और परेशान करने वाली सारी बातें हाशिए में चली गईं। सारी खबरें एक झटके में गायब हो गईं। शेयर बाजार अलग रिकॉर्ड तोड़ रहा है। आम बजट के बाद शेयर बाजार और आम लोगों की जो प्रतिक्रिया थी वह बजट को निगेटिव लाइट में दिखा रही थी। वह चर्चा भी समाप्त हो गई। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संधि की खबर आई और सारी खबरें दब गईं। हालांकि इसमें भी एक ट्रेंड दिखा। डील की घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने की। इससे पहले उन्होंने भारत और पाकिस्तान के सीजफायर का ऐलान किया था, उन्होंने रूस से भारत के तेल खरीदना बंद करने का ऐलान किया था और यह भी ऐलान किया था कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। उसी तरह उन्होंने भारत के साथ व्यापार संधि का ऐलान किया।
राष्ट्रपति ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के करीब एक घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी पुष्टि की। अब सोचें, इससे पहले क्या खबर चल रही थी? राहुल गांधी ने संसद में जनरल एमएम नरवणे की अभी तक नहीं छपी किताब के हवाले से बताया कि 31 अगस्त 2020 की रात को चीन के टैंक डोकलाम तक पहुंचे थे। इस किताब के जो अंश सामने आए हैं उसमें जनरल नरवणे ने लिखा है कि 31 अगस्त 2020 की रात को सवा आठ बजे उनको लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने फोन किया और बताया कि चीन के चार टैंक भारत की ओर बढ़ रहे हैं। उसके बाद से साढ़े 10 बजे तक जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत को फोन करते रहे लेकिन कोई निर्देश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि रात साढ़े 10 बजे कहा गया कि आपको जो ठीक लगे वह करें। इसी तरह एपस्टीन फाइल्स का विवाद छिड़ा है। सो, बजट से लेकर नरवणे की किताब और एपस्टीन फाइल से लेकर ममता बनर्जी की एसआईआर का मुद्दा सब हाशिए में गए।
