तेज प्रताप यादव के बाद अब दांव चलने की बारी तेजस्वी यादव की है। वे पार्टी पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के लिए अपने को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनवाना चाह रहे हैं। उन्होंने यह समझाया है कि अगर पार्टी की कमान पूरी तरह से उनके हाथ में आएगी तभी राजद के बारे में बिहार के लोगों की धारणा बदलेगी और पुराने जिन्न से पीछा छूटेगा। बहरहाल, पिछले दिनों तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही चूड़ा का भोज दिया, जिसमें लालू प्रसाद शामिल होने पहुंच गए। इतना ही नहीं लालू प्रसाद ने तेज प्रताप का निर्वासन समाप्त करते हुए कहा कि वे अब परिवार के साथ रह सकते हैं। ध्यान रहे विधानसभा चुनाव से ऐन पहले लालू प्रसाद ने तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से निकाल दिया था। अब उनकी वापसी हो रही है। दूसरी ओर परिवार में नए तरह का ध्रुवीकरण हो रहा है। रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी के करीबी नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोला है। अगर तेज प्रताप, रोहिणी और मीसा भारती एक होते हैं तो तेजस्वी की स्थिति कमजोर होगी।
तभी कहा जा रहा है कि तेजस्वी ने पार्टी पर कंट्रोल बढ़ाने का दांव चला है। जानकार सूत्रों का कहना है कि अगले रविवार को यानी 25 जनवरी को तेजस्वी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन जाएंगे। उन्होंने इसके लिए पहल कर दी है। अगर ऐसा होता है तो मीसा भारती के साथ टकराव का मोर्चा खुल सकता है। वे दो बार राज्यसभा सांसद रही हैं और अभी लोकसभा में सांसद हैं। उन्होंने कुछ समय पहले लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के सामने यह इच्छा जताई थी कि उनको कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। यह विधानसभा चुनाव से पहले की बात है। उस समय उन्होंने कहा था कि अगर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का दावेदार बनाया जा रहा है तो उन्हें भी कुछ दिया जाए। अपने लिए उन्होंने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद मांगा था। लेकिन अब तेजस्वी यादव टोटल कंट्रोल चाह रहे हैं। इस चक्कर में परिवार में टकराव और बढ़ेगा।
