तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता ने अपने पिता की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति से इस्तीफा देने के बाद अब विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। विधान परिषद में उन्होंने सोमवार को बेहद भावुक भाषण दिया और अपने पिता की पार्टी के दिशाहीन हो जाने और उसमें भ्रष्टाचार आ जाने के आरोप लगाए। वे सदन में रोने भी लगी थीं। अब वे तेलंगाना जागृति पार्टी बना कर राजनीति करेंगी। बड़े नेताओं के बेटे या बेटी पहले भी परिवार से अलग पार्टी बना कर राजनीति करते रहे हैं। लेकिन कामयाबी किसी को नहीं मिली है। पार्टी के संस्थापक का साथ जिसको मिला है या परिवार के ज्यादा सदस्य जिसके साथ रहे हैं उसी को कामयाबी मिली है। क्या कविता इस जिंक्स को तोड़ पाएंगी?
पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी वाईएसआर रेड्डी की बेटी वाईएस शर्मिला ने पार्टी बना कर राजनीति की लेकिन कामयाब नहीं हुईं और उन्होंने बाद में पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। एनटी रामाराव के परिवार के कुछ सदस्यों ने भी अलग राजनीति का प्रयास किया लेकिन वे चंद्रबाबू नायडू को नहीं रोक पाए और बाद में सब उनके साथ आए। तमिलनाडु में करुणानिधि के बड़े बेटे अलागिरी जब परिवार से अलग हुए तो समाप्त हो गए। महाराष्ट्र में राज ठाकरे, उत्तर प्रदेश में शिवपाल यादव, बिहार में साधु यादव या तेज प्रताप यादव, पंजाब में मनप्रीत बादल जैसी अनेक मिसाले हैं। प्रादेशिक पार्टियों में आमतौर पर संस्थापक जिसको उत्तराधिकारी बनाते हैं उसी की राजनीति चलती है। के कविता क्या कर पाती हैं यह देखने वाली बात होगी?
