अगले साल अप्रैल में महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से दो सीट शरद पवार की एनसीपी की है। एक सीट उद्धव ठाकरे की शिव सेना की है और एक सीट कांग्रेस की है। यानी विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी की चार सीटें हैं। बाकी तीन सीटें महायुति की हैं, जिनमें दो भाजपा की और एक आरपीआई अठावले की है। विपक्षी गठबंधन की चार सीटों में से एक सीट शरद पवार की है। उनकी पार्टी की फौजिया खान भी रिटायर हो रही हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी से प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस से रजनी पाटिल रिटायर हो रही हैं। अपने दम पर विपक्षी गठबंधन को एक सीट मिल सकती है। उद्धव ठाकरे की कोशिश होगी कि सीट उनके खाते में जाए। वैसे भी उनकी पार्टी के सबसे ज्यादा 20 विधायक हैं। इसी आधार पर उनकी पार्टी ने मुख्य विपक्षी पार्टी का दावा भी किया है। दूसरी ओर आठ एमएलसी के दम पर कांग्रेस ने विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल का दावा किया है।
जाहिर है तीनों पार्टियां अपनी अपनी संख्या के हिसाब से दावेदारी कर रही हैं। उद्धव ठाकरे के 20, कांग्रेस के 16 और शरद पवार के सिर्फ 10 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 35 वोट की जरुरत है। उद्धव और कांग्रेस को मिला कर 36 वोट हैं। यानी वे अपने दम पर एक सीट जीत सकते हैं। विपक्षी गठबंधन को सिर्फ एक ही सीट मिलेगी। बची हुई छह सीटें महायुति के खाते में जाएंगी, जिनमें से तीन सीट भाजपा के लेने की चर्चा है। बाकी तीन में से एक सीट फिर से अठावले को दी जा सकती है और एक एक सीट एकनाथ शिंदे और अजित पवार को मिलेगी। अगर पवार परिवार एक हो जाता है तो शरद पवार एनसीपी की ओर से राज्यसभा चले जाएंगे। 16 जनवरी को बीएमसी, पीएमसी सहित 29 शहरी निकायों के चुनाव नतीजे आएंगे उसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत सी चीजें तय होंगी। अभी तो शरद पवार दोनों नावों की सवारी कर रहे हैं।
