राज्यसभा के लिए शह मात का खेल

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खबर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से  मिले तो बिहार में राज्यसभा सीटों को लेकर चर्चा हुई। पता नहीं यह बात कितनी सही है क्योंकि शिष्टाचार मुलाकातों में आमतौर पर इस तरह की बातें नहीं होती हैं और दूसरी बात यह है कि सीधे मोदी, शाह और नीतीश राज्यसभा की बात नहीं करते हैं। पहले प्रभारी और प्रदेश के नेताओं के स्तर पर यह बात होती है। फिर भी यह खबर मीडिया में आई है कि राज्यसभा को लेकर चर्चा हुई तो निश्चित रूप से भाजपा या जनता दल के किसी नेता की ओर से यह बात मीडिया को बताई गई है। राज्यसभा का मामला इसलिए दिलचस्प हो गया है क्योंकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बहुत जोर से राज्यसभा की एक सीट पर दावा ठोका है। उन्होंने कहा है कि वे गठबंधन छोड़ सकते हैं। मांझी ने अपने बेटे और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन का इस्तीफा कराने की भी बात कही। उनका कहना है कि उनके साथ बहुत धोखा हुआ है।

यही से पूरे घटनाक्रम को लेकर संदेह पैदा होता है। मांझी को जानने वाले जानते हैं कि वे न तो केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने जा रहे हैं और न उनका बेटा बिहार में मंत्री पद छोड़ने वाला है। फिर इस तरह के बयान का क्या मतलब है? असल में यह एक योजना का हिस्सा लग रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के कहने पर मांझी इस किस्म के बयान दे रहे हैं। ध्यान रहे इसी किस्म के बयान उन्होंने विधानसभा चुनाव के समय टिकट बंटवारे को लेकर भी दिया था। उन्होंने कम से कम 15 सीटों की मांग रखी थी। उसे अपने सम्मान और अपनी पार्टी के लिए राज्य स्तरीय दल का दर्जा हासिल करने से जोड़ा था। लेकिन उनको सिर्फ छह सीटें मिलीं, जो पिछली बार लड़ी सीटों से एक कम थी। फिर भी वे गठबंधन में बने रहे। अपने को प्रधानमंत्री मोदी का चेला बताते रहे, जबकि उनकी उम्र मोदी से ज्यादा है और राजनीतिक अनुभव भी ज्यादा है। उस समय भी वे भाजपा और जनता दल यू के कहने पर बयान दे रहे थे ताकि चिराग पासवान की पार्टी को कम सीटों पर रोका जा सके। बाद में छह सीट पर इसलिए कोई आपत्ति नहीं की ताकि उपेंद्र कुशवाहा भी कोई आपत्ति न कर सकें।

अब जो बयान है उसका मकसद उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान की राज्यसभा रोकना है। गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा का चुनाव हारने के बाद उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा गया था। उनका कार्यकाल दो साल का था, जो अप्रैल में खत्म हो रहा है। उन्होंने बिना विधायक हुए अपने बेटे को मंत्री बना दिया है। खबर है कि उनके बेटे को मंगल पांडेय की खाली हुई विधान परिषद सीट से एमएलसी बनाया जा रहा है। इसलिए उनकी राज्यसभा पर पहले से ग्रहण लगा हुआ है। लेकिन मांझी ने दावा करके मुश्किल और बढ़ा दी है। चिराग पासवान की पार्टी को भी एक राज्यसभा सीट मिलने की चर्चा थी लेकिन कहा जा रहा है कि कुशवाहा और मांझी की खींचतान की वजह से उनका भी मामला अटकेगा। अगले साल खाली हो रही पांच में से तीन सीटें भाजपा और दो जनता दल यू को मिलेंगी। भाजपा से नितिन नबीन और पवन सिंह का नाम तय बताया जा रहा है।


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