यूपी के नए भाजपा अध्यक्ष के मायने

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आखिरकार लंबे इंतजार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में नए अध्यक्ष का फैसला कर लिया। नरेंद्र मोदी सरकार के वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने शनिवार को नामांकन भरा। इकलौता नामांकन होने की वजह से उनका नाम तय है और रविवार को पीयूष गोयल की मौजूदगी में इसकी औपचारिक घोषणा होगी। वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले जाट समाज के भूपेंद्र चौधरी की जगह लेंगे। पंकज चौधरी का प्रदेश अध्यक्ष बनना एक बड़े घटनाक्रम का संकेत है। इस बात को कई पहलुओं से समझा जा सकता है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मर्जी के बगैर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा आलाकमान को अंदाजा था कि उनके नाम का विरोध हो सकता है इसलिए भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष खुद लखनऊ गए थे। उन्होंने अनेक लोगों से खुद बात की। उनके अलावा पार्टी के महामंत्री विनोद तावड़े को प्रभारी बना कर भेजा गया और पीयूष गोयल भी जाएंगे।

पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने का सबसे अहम पहलू यह है कि वे महाराजगंज के सांसद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर से सटे ही महाराजगंज है, जहां से पंकज चौधरी सात बार से सांसद का चुनाव जीत रहे हैं। चौधरी 1991 से चुनाव लड़ रहे हैं और योगी आदित्यनाथ के गुरु योगी अवैद्यमाथ 1989 में पहली बार चुनाव लड़े थे। यानी पंकज चौधरी मुख्यमंत्री के गुरू के समकालीन नेता हैं। ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूर्वांचल की वाराणसी सीट से सांसद हैं। इस तरह प्रधानमंचत्री, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष तीनों एक ही इलाके के हो गए। सवाल है कि भाजपा ने क्या क्षेत्रीय असंतुलन का ध्यान नहीं ऱखा है? या पार्टी की आगे की रणनीति कुछ और है यह समझने वाली बात है। अभी ,सीधे तर पर यह नहीं कहा जा सकत है कि मुख्यमंत्री बदला जाएगा लेकिन आमतौर पर सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों एक ही इलाके से नहीं होते हैं।

दूसरी खास बात यह है कि पंकज चौधरी कुर्मी जाति से आते हैं। गौरतलब है कि पिछड़ी जातियों में आबादी के हिसाब से गैरयादव पिछड़ी जातियों में सबसे बड़ी जाति कुर्मी है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी आबादी करीब आठ फीसदी है। ध्यान रहे कोईरी जाति से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री हैं और कुर्मी समाज की अनुप्रिया पटेल को केंद्र में मंत्री बनाया गया है। उनकी पार्टी अपना दल से भाजपा का तालमेल है। सवाल है कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ कोईरी, कुर्मी समीकऱण साधने पर इतना ध्यान क्यों दे रही है? लोध की अनदेखी क्यों की गई है? पहले कहा जा रहा था कि राज्य सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

बीएल वर्मा के नाम की भी चर्चा थी।  दोनों लोध समाज से आते हैं। साध्वी निरंजन ज्योति के नाम की भी चर्चा हुई। लेकिन सारे नाम छोड़ कर पंकज चौधरी चुने गए। दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके घर गए थे। तभी से इस बात की चर्चा हो रही थी। यह स्पष्ट है कि नए प्रदेश अध्यक्ष पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के प्रति ज्यादा निष्ठावान हैं। मुख्यमंत्री योगी आदितायनाथ के साथ उनके साथ उनकी दुश्मनी नहीं है तो दौस्ती भी नहीं है। सो, उत्तर प्रदेश का घटनाक्रम बहुत दिलचस्प हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले गुजरात और उत्तर प्रदेश ये दो बड़े राज्य थे. जहां चुनाव होना था। इन दोनों राज्यों के चुनाव के बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।


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