मंगलवार, नौ दिसंबर को कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की 79वां जन्मदिन था। कांग्रेस ने संसद भवन में उनका जन्मदिन बनाया, जिसकी एक तस्वीर मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल हुई। इसमें सहयोगी पार्टियों के नेता भी शामिल हुए और बाद में अखिलेश यादव ने उसकी तस्वीर भी साझा की। क्या यह कांग्रेस गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक में सब ठीक होने का संकेत है? सपा और दूसरी सहयोगी पार्टियों के नेता ऐसा नहीं मान रहे हैं। एक नेता ने ध्यान दिलाया कि भाजपा के सांसद नवीन जिंदल की बेटी की शादी थी तो उसमें भाजपा की कंगना रनौत और राजीव प्रताप रूड़ी के साथ एनसीपी की सुप्रिया सुले और तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा भी डांस कर रहे थे। इससे कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जा सकता है। सामाजिक कार्यक्रम में सभी पार्टियों के नेता मिलते हैं।
समाजवादी पार्टी के एक नेता ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि गठबंधन बचाने की जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की है। उसके नेता अगर चाहेंगे तो गठबंधन चलता रहेगा। इसके लिए कांग्रेस को क्या करना होगा, इसका हालांकि उन्होंने कोई रोडमैप नहीं दिया। असल में मंगलवार को संसद में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस थोड़ी थोड़ी सुधर रही है। थोड़ा थोड़ा क्या सुधार हुआ है यह उन्होंने भी नहीं बताया। हालांकि अपने भाषण में उन्होंने चुनाव सुधार को लेकर कांग्रेस के दो सुझावों को स्वीकार करने की बात कही। अखिलेश ने कहा कि वे कांग्रेस के इस सुझाव से सहमत हैं कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का सिस्टम बदला जाए। गौरतलब है कि कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि नियुक्ति के लिए बनाए गए तीन सदस्यों के पैनल को पांच सदस्यों का बनाया जाए और उसमें राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी शामिल किया जाए। अभी प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पैनल चुनाव आयुक्तों को नियुक्त करता है। अखिलेश ने कांग्रेस का दूसरा सुझाव यह स्वीकार किया कि मतदान ईवीएम की बजाय बैलेट से होना चाहिए।
बहरहाल, अब कांग्रेस के नेता भी इस तलाश में लगे हैं कि अखिलेश यादव ने थोड़े सुधार की बात किस संदर्भ में कही। ध्यान रहे उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस और सपा एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस बीच ‘इंडिया’ ब्लॉक की सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कह दिया कि गठबंधन आईसीयू में है और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है। उनकी पार्टी का भी कहना है कि गठबंधन को लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा कर मजबूती देने और बचाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है। अब कांग्रेस के नेता परेशान हैं कि गठबंधन बचाने के लिए क्या करें? गठबंधन में शामिल प्रादेशिक पार्टियां लोकसभा चुनाव में भी अपने अपने असर वाले राज्य में कांग्रेस से ज्यादा सीटें मांग रही हैं और विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बहुत कम सीटें देने का प्रस्ताव कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस क्या करे? विधानसभा में कम और लोकसभा में ज्यादा सीट का फॉर्मूला रहता तब भी ठीक था। लेकिन उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और तमिलनाडु से लेकर महाराष्ट्र व झारखंड तक सहयोगी पार्टियां लोकसभा की भी ज्यादा सीट ले रही हैं या मांग रही हैं।
