नेताओं की कथनी और करनी को लेकर बहुत सारी बातें होती हैं। आमतौर पर दोनों में कोई तालमेल नहीं होता है। इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण गुरुवार, 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में हुए शपथ समारोह में दिखा। उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर बड़ी शान से शपथ ग्रहण के मंच पर मौजूद थे। वे पीला गमछा रखे मुख्य मंच पर थे। गौरतलब है कि गांधी मैदान में दो मंच बनाए गए थे, जिसमें एक पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आदि थे। उसी मंच पर राजभर मौजूद थे।
सोचें, बिहार विधानसभा के पूरे चुनाव में राजभर ने एनडीए के खिलाफ प्रचार किया था। उन्होंने 50 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और जनता दल यू के खिलाफ बोलते रहे थे। इतना ही नहीं चुनाव खत्म होने के बाद राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के जीतने की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव में जब भी वोट बढ़ता है तब राजद की जीत होती और चूंकि इस बार 10 फीसदी वोट बढ़ा है इसलिए राजद की सरकार बनना तय है। लेकिन जब राजद का सफाया हो गया और एनडीए की सरकार भारी बहुमत से बन गई तो राजभर पीला गमछा लेकर शपथ के मंच पर पहुंच गए।
