सबसे कमाल गठबंधन महाराष्ट्र में है

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महाराष्ट्र जैसा गठबंधन देश के किसी और राज्य में देखने को नहीं मिलता है। वहां के पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक भी मजाक में एक गंभीर बात कहते हैं कि कांग्रेस और भाजपा को छोड़ कर महाराष्ट्र में कोई भी पार्टी किसी के भी साथ तालमेल कर सकती है। कांग्रेस और भाजपा की सहयोगी पार्टियां भी इनके साथ रहते हुए आपस में तालमेल कर सकती हैं। वहां की एक दिलचस्प बात यह भी है कि लोकसभा और विधानसभा से ज्यादा गंभीरता से वहां की पार्टी स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ती हैं और उसमें कोई किसी के साथ भी जा सकता है। अभी महाराष्ट्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से स्थानीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं। नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव दो दिसंबर को होने हैं और उसके बाद महानगरपालिकाओं के चुनाव होंगे। इनमें मुंबई का बीएमसी भी है और पुणे, ठाणे, नागपुर आदि के भी स्थानीय निकाय चुनाव हैं। वह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही होंगे और जनवरी में कराए जाएंगे। उसमें भी क्या गठबंधन होगा यह कोई नहीं जानता है।

अभी जो चुनाव हो रहे हैं उसमें खूब दिलचस्प नजारे हैं। एक जगह शरद पवार और अजित पवार दोनों की पार्टियों ने तालमेल कर लिया है। कुछ जगहों पर पवार चाचा, भतीजे दोनों की एनसीपी के साथ एकनाथ शिंदे की शिव सेना का तालमेल होने की खबर है। कुछ जगहों पर महायुति यानी भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिव सेना और अजित पवार की एनसीपी एक साथ लड़ेंगे। इस बारे में जब पूछा गया तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस वे बहुत दिलचस्प जवाब दिया। उन्होंने कहा कि महाऱाष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव ऐसे ही होते हैं क्योंकि भाजपा भी अपनी स्थानीय इकाइयों को यह अधिकार दे देती है कि वे अपने हिसाब से गठबंधन बनाएं और उम्मीदवार तय करें। उन्होंने कहा कि इसलिए कहीं दो पार्टियां तो कहीं तीन पार्टियां तालमेल करके लड़ रही हैं।

अब सवाल है कि बीएमसी के साथ साथ पुणे, ठाणे, नागपुर आदि महानगरों के चुनाव होंगे तब क्या होगा? सबको पता है कि बीएमसी के मदर ऑफ ऑल लोकल बॉडीज माना जाता है। उसका बजट कई राज्यों के बजट से बड़ा है और अगर सुप्रीम कोर्ट का दबाव नहीं होता तो प्रदेश की भाजपा सरकार कभी चुनाव नहीं कराती। अभी बीएमसी का प्रशासन राज्य सरकार के हाथ में ही है क्योंकि कई बरसों से बीएमसी के चुनाव नहीं हुए हैं। कहा जा रहा है कि बीएमसी का चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों अलग अलग लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि भाजपा की दोनों सहयोगी पार्टियों यानी एकनाथ शिंदे की शिव सेना और अजित पवार की एनसीपी का मुंबई में कोई आधार नहीं है। उनके साथ दूसरी जगहों पर तालमेल हो सकता है लेकिन मुंबई में नहीं होगा। ऐसे ही कांग्रेस की सहयोगी शरद पवार की एनसीपी का मुंबई में आधार नहीं है। हालांकि उद्धव ठाकरे की शिव सेना का बहुत मजबूत आधार है लेकिन उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे से हाथ मिला लिया है इसलिए वहां कांग्रेस अलग होकर लड़ने की तैयारी कर रही है। यह पता नहीं है कि कांग्रेस और भाजपा अलग अलग लड़ेंगे तो उनकी सहयोगी पार्टियां बीएमसी में सभी सीटों पर अलग लड़ेंगी या कम सीटों पर लड़ेंगी या नहीं लड़ेंगी!


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