नई दिल्ली। ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन के दूसरे दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ओपन सत्र में अपनी बात रखी। उन्होंने पश्चिम के देशों पर निशाना साधा। हालांकि शी ने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि वैश्विक स्थिति बदल रही है और अब ताकतवर के हिसाब से काम करने का नियम नहीं चलेगा। जिनपिंग ने अपने भाषण में ‘ताकत ही सही है’ के विचार की आलोचना की और कहा कि सभी देशों के संप्रभुता समान है।
अपने भाषण में जिनपिंग ने ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ का प्रस्ताव रखा है। गौरतलब है कि वे काफी समय से और देशों को ब्रिक्स में शामिल करने की वकालत करते रहे हैं। वे इसका आकार बढ़ा कर ग्लोबल साउथ के कुछ देशों को इसमें शामिल करना चाहते हैं। शी जिनपिंग ने अमेरिका या किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में ताकत का सिद्धांत नहीं चलेगा और सभी देशों को समानता मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का आकार, शक्ति या आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, वैश्विक समुदाय में सभी देशों को समान दर्जा मिलना चाहिए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ने ग्लोबल साउथ को एकजुट करने और ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए एआई ओपन सोर्स कम्युनिटी, डिजिटल इकोसिस्टम और इंजीनियर ट्रेनिंग एलायंस सहित पांच प्रमुख वैश्विक पहलों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को एकजुट करना होगा, अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक सक्रिय, स्थिर और सकारात्मक शक्ति बनना होगा और समस्त मानवता के कल्याण को आगे बढ़ाना होगा।
