हर घुसपैठिए को ‘एक-एक करके’ बाहर निकाला जाएगा : अमित शाह

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने न केवल घुसपैठ रोकने का बल्कि हर एक अवैध व्यक्ति की पहचान करने और उन्हें देश से बाहर निकालने का भी संकल्प लिया है।  

बीएसएफ के संस्थापक और पहले बॉर्डर गार्ड की याद में आयोजित ‘के.एफ. रुस्तमजी व्याख्यान’ देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार जनसांख्यिकी में किसी भी तरह के कृत्रिम बदलाव की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा मजबूत करने के लिए त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने का भी वादा किया।

जनसांख्यिकी में बदलाव के प्रयास को एक साजिश बताते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा, “बीएसएफ को इस साजिश को नाकाम करना होगा। आज मैं यह कह सकता हूं कि त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो इस सिद्धांत का समर्थन करती हैं कि कोई घुसपैठ नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बीएसएफ को न केवल सीमा की रक्षा करनी चाहिए बल्कि घुसपैठियों, घुसपैठ के रास्तों और मवेशियों की तस्करी के रास्तों का पता लगाने और उन्हें बंद करने के लिए गांव के पटवारी, पुलिस स्टेशन, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ संवाद के पुल भी बनाने चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “इन गतिविधियों की पहचान करना और उन्हें रोकना बीएसएफ की जिम्मेदारी है।” अमित शाह ने कहा कि बहुत जल्द, घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने के लिए मंत्रालय में इन तीन सीमावर्ती राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाई जाएगी।

माओवाद के खात्मे के सफल उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “अब वह समय आ गया है जब घुसपैठ को भी पूरी तरह खत्म कर दिया जाना चाहिए। जब हमने माओवाद को खत्म करने का फैसला किया था, तो कई अधिकारियों ने हमें आगाह किया था कि हमें आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हमारे बहादुर जवानों ने उस कठिन कार्य को भी पूरा कर दिखाया।

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उन्होंने कहा, “इसी तरह, मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे जवान घुसपैठ को भी जड़ से खत्म कर देंगे। सुरक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज करके सालों तक बने रहने देने के बजाय, उसे जड़ से खत्म करना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि घुसपैठ को रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया है ताकि वे लोगों को गिरफ्तार कर सकें और तलाशी अभियान चला सकें। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपना शुरू कर दिया है।

इस कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें बीएसएफ के 43 जवानों को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 1965 से 2025 तक का बीएसएफ का सफर यह दिखाता है कि कैसे एक ऐसा संगठन, जिसने मुश्किल हालात और सीमित संसाधनों के साथ अपनी शुरुआत की थी, आज दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित सीमा सुरक्षा बल के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा कि बीएसएफ इस बात का सबसे बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे देशभक्ति की भावना सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करके वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती है।

उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि बीएसएफ के जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में (चाहे तापमान 45 डिग्री से ज्यादा हो या बहुत कम, चाहे घने जंगल हों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ हों, या फिर तटीय इलाके) जिस तरह की देशभक्ति और समर्पण दिखाया है, उसी की बदौलत बीएसएफ को देश की ‘रक्षा की पहली पंक्ति’ होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में यह फैसला लिया गया था कि हर सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी एक विशेष बल को सौंपी जाएगी। बीएसएफ की क्षमताओं को देखते हुए उसे देश की दो सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं (बांग्लादेश और पाकिस्तान) की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई।

Pic Credit : ANI


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