ईटीजीई की ट्रंप से अपील, ‘जिनपिंग के सामने उठाएं ईस्ट तुर्किस्तान और तिब्बत का मुद्दा’

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ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट-इन-एक्साइल (ईटीजीई) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट (ईटीएनएम) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक के दौरान चीन ईस्ट तुर्किस्तान और तिब्बत में किए जा रहे कथित “नरसंहार” और “औपनिवेशिक कब्जे” का मुद्दा उठाएं।

राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को दो दिवसीय उच्चस्तरीय शिखर वार्ता के लिए चीन की राजकीय यात्रा पर रवाना हुए। लगभग एक दशक में किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा मानी जा रही है।

ट्रंप से की गई अपील में ईटीजीई ने आरोप लगाया कि चीनी कब्जे वाले “ईस्ट तुर्किस्तान” (जिसे चीन का शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र भी कहा जाता है) में उइगर, कजाख, किर्गिज और अन्य तुर्किक समुदायों के खिलाफ चल रहे कथित नरसंहार का आदेश दिया था। निर्वासित संगठन का दावा है कि इस अभियान को अब 13 साल होने वाले हैं।

निर्वासित संगठनों ने अमेरिकी राष्ट्रपति से यह भी आग्रह किया कि शिखर सम्मेलन के दौरान ऐसा कोई समझौता न किया जाए जो ईस्ट तुर्किस्तानी और तिब्बती लोगों के “नरसंहार और दासता” को बढ़ावा दे।

संगठनों ने कहा, “ईस्ट तुर्किस्तान में चीन के सबसे बड़े बेरिलियम भंडार और लिथियम, जिरकोनियम, रुबिडियम, टाइटेनियम, मैग्नीशियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के बड़े भंडार मौजूद हैं। यही वे महत्वपूर्ण खनिज हैं जिन पर इस शिखर सम्मेलन में बातचीत हो रही है। इनका दोहन कब्जे वाले क्षेत्र से उन परिस्थितियों में किया जा रहा है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में दासता माना है।

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ईटीजीई के अनुसार, जिनपिंग के कथित अभियान के तहत “व्यापक नजरबंदी, जबरन श्रम के जरिए बड़े पैमाने पर गुलामी, जबरन नसबंदी, दस लाख से अधिक उइगर और अन्य तुर्किक बच्चों को उनके परिवारों से अलग करना तथा सैकड़ों हजारों लोगों के अंगों की जबरन निकासी” जैसी गतिविधियां जारी हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि चीन के 2026 के “एथनिक यूनिटी लॉ” ने गैर-चीनी पहचान को मिटाने की प्रक्रिया को कानूनी रूप दे दिया है।

ईटीजीई के अध्यक्ष मामतिमिन अला ने कहा, “हमारे मानवाधिकारों और अस्तित्व की गारंटी का समाधान उपनिवेशवाद का अंत और ईस्ट तुर्किस्तान की राष्ट्रीय स्वतंत्रता की बहाली करना है। 5 मई को हमने संयुक्त राष्ट्र डिकॉलोनाइजेशन कमेटी में ईस्ट तुर्किस्तान की पहली औपचारिक याचिका दायर की है और हम अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हमारी स्वतंत्रता बहाल करने के संघर्ष का समर्थन करने की अपील करते हैं।

निर्वासित संगठनों ने चीन के ईस्ट तुर्किस्तान पर “कब्जे” को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने अपने सभी परमाणु परीक्षण ईस्ट तुर्किस्तानी क्षेत्र में किए, जिनमें 2020 का एक परीक्षण भी शामिल है, और अब वहां अमेरिका को निशाना बनाने वाले सैकड़ों अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) साइलो का निर्माण कर रहा है।

संगठनों ने यह भी दावा किया कि चीन ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण एआई और डेटा सेंटर अवसंरचना स्थापित की है।

ईटीजीई के विदेश मंत्री और ईटीएनएम के अध्यक्ष सलीह हुदयार ने कहा, “शिखर सम्मेलन में जिन महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा हो रही है, वे सब कब्जे वाले ईस्ट तुर्किस्तान से नरसंहार और दासता के जरिए निकाले जा रहे हैं। एक स्वतंत्र और मुक्त ईस्ट तुर्किस्तान अमेरिका को प्रतिस्पर्धी दरों पर ये खनिज उपलब्ध करा सकता है, जिससे अमेरिकी उद्योग मजबूत होगा और बीजिंग की पकड़ कमजोर पड़ेगी।

Pic Credit : ANI


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