म्यांमार की नेता आंग सान सू की जेल से रिहा, घर में नजरबंद

Categorized as समाचार

म्यांमार की नेता आंग सान सू की को जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्हें नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में भेज दिया गया है। यह कदम सैन्य शासन वाले देश में लोकतंत्र का आभास देने के लिए उठाया गया माना जा रहा है, खासकर तब जब सैन्य नेता मिन आंग ह्लाइंग को राष्ट्रपति चुना गया है। 

म्यांमार के सूचना मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति ने “नै पि ताव जेल में सजा काट रहीं दाउ आंग सान सू की की बाकी सजा को नजरबंदी में बदलने का फैसला किया है।”

सू की पहले राज्य परामर्शदाता (स्टेट काउंसलर) और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नागरिक सरकार की वास्तविक प्रमुख थीं, सरकार को 2021 में सेना ने तख्तापलट करके हटा दिया था।

तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग, जो अब तक जुंटा प्रमुख थे, 3 अप्रैल को संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने गए। यह संसद दिसंबर से जनवरी के बीच हुए चुनावों के बाद, जिसमें सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने भाग नहीं लिया, क्योंकि 2021 के तख्तापलट के बाद उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।

राष्ट्रपति बनने के बाद, अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश में ह्लाइंग ने सामाजिक सुलह के लिए आम माफी (एमनेस्टी) देने का वादा किया था।

म्यांमार को अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की जरूरत है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है, पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप से भी हालात बिगड़े हैं, और देश कई जातीय विद्रोहों का सामना कर रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट को 17 अप्रैल को 4,300 से अधिक राजनीतिक कैदियों के साथ रिहा किया गया था। जुंटा ने इसे म्यांमार के नववर्ष के अवसर पर उठाया गया कदम बताया।

Also Read : योगी आदित्यनाथ के बयान पर अखिलेश यादव का पलटवार

निर्वासित राष्ट्रीय एकता सरकार (एनयूजी), जो पिछली सरकार का प्रतिनिधित्व करती है, ने कहा कि वह “कुछ राजनीतिक कैदियों — जिनमें हमारे राष्ट्रपति यू विन म्यिंट भी शामिल हैं — की रिहाई से संतुष्ट है, जिन्हें सैन्य तानाशाही ने अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया था।

सूचना मंत्रालय ने कहा कि 80 वर्षीय और शारीरिक रूप से कमजोर सू की को नजरबंदी में भेजने का फैसला “राज्य की उदारता और सद्भावना” को दर्शाता है।

यह फैसला “कसोन पूर्णिमा” के अवसर पर भी लिया गया, जो म्यांमार के बौद्धों के लिए पवित्र दिन है और भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है।

सैन्य शासन के दौरान सू की पर वॉकी-टॉकी रखने जैसे मामूली आरोपों से लेकर देशद्रोह और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए और उन्हें कुल 33 साल की सजा सुनाई गई। बाद में इसे घटाकर 22 साल 6 महीने किया गया, और अब इसमें और कटौती की गई है, हालांकि वह नजरबंदी में ही रहेंगी।

दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक सू की, म्यांमार के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता आंग सान की बेटी हैं, जिनकी 1948 में आजादी से पहले हत्या कर दी गई थी।

म्यांमार में 1962 के तख्तापलट के बाद से ज्यादातर समय सैन्य शासन रहा है, बीच-बीच में थोड़े समय के लिए लोकतंत्र का राज रहा है।

सू की 1988 में म्यांमार लौटीं और एलएलडी की नेता बनीं। इसके बाद से वह कई बार जेल गईं और नजरबंदी में रही हैं।

उनकी शादी एक ब्रिटिश नागरिक से हुई थी, और इसी आधार पर सेना ने उन्हें राष्ट्रपति बनने से रोक दिया। इसके बाद एनएलडी ने उन्हें “स्टेट काउंसलर” बनाया, जिससे वह सरकार में प्रमुख भूमिका निभा सकीं।

Pic Credit : ANI


Previous News Next News

More News

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

July 30, 2026

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद…

logo