अराघची दोबारा पाकिस्तान पहुंचे

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नई दिल्ली। ईरान ने युद्धविराम को लेकर अमेरिका से बातचीत आगे बड़ाने का संकेत दिया है। पाकिस्तान को वार्ता के बिंदु और अपनी मांगें सौंप कर ओमान चले गए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार को दोबारा पाकिस्तान लौटे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे सकारात्मक संकेत बताया है। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का दूसरा दौर कब शुरू होगा यह तय नहीं है क्योंकि इस्लामाबाद में थोड़ी देर रूक कर अराघची का रूस जाने का कार्यक्रम है। इससे पहले वे पाकिस्तान के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

गौरतलब है कि अराघची शुक्रवार की रात को इस्लामाबाद पहुंचे थे। उन्होंने शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी, जिसमें उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसीम मुनीर भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि ईरान ने अपनी शर्तें और आपत्तियां पाकिस्तान को सौंप दी। इसके बाद अराघची शनिवार को ही ओमान चले गए। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान की ओर से दिए गए दस्तावेज अमेरिका को सौंपे हैं। तभी अराघची के रविवार को पाकिस्तान लौटने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

असल में ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा और अपनी बात पाकिस्तान के जरिए ही पहुंचाएगा। तभी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अपने दामाद जेरेड कुशनरको पाकिस्तान नहीं भेजा। पाकिस्तान के जरिए ही दोनों की बातचीत होगी और किसी समझौते पर पहुंचने की सहमति बनने के बाद ही दोनों देशों के नेता आमने सामने बैठ कर बात करेंगे।

दोबारा पाकिस्तान लौटने से पहले अराघची ओमान पहुंचे थे, जहां उन्होंने रविवार को ओमान के सुल्तान तारिक बिन हैथम से मुलाकात की। इस दौरान पश्चिम एशिया की जंग और शांति बहाली की कोशिशों पर चर्चा हुई। अराघची ने ओमान की कूटनीतिक भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि बातचीत के जरिए ही समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सैन्य मौजूदगी से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ती है। ओमान के सुल्तान ने उम्मीद जताई कि युद्ध जल्द खत्म होगा और क्षेत्र में शांति लौटेगी। बैठक में ओमान के विदेश मंत्री भी मौजूद रहे।

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि तेहरान दबाव और धमकियों के बीच अमेरिका के साथ जबरन बातचीत नहीं करेगा। अमेरिकी मीडिया समूह ‘सीएनएन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बातचीत में पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिकी कदम भरोसे को कमजोर कर रहे हैं और बातचीत की राह को मुश्किल बना रहे हैं। साथ ही उन्होंने जहाजों पर लगी नाकेबंदी हटाने को भी जरूरी शर्त बताया।


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