अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा रही

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नई दिल्ली। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पिछले करीब पांच दशक में पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच आमने सामने की बातचीत हुई। दोनों देशों ने सीधी बातचीत की और युद्ध से जुड़े सभी मसलों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि शनिवार को हुई पहले दौर की वार्ता में ईरान ने लेबनान पर तत्काल हमला रोकने को कहा। करीब दो घंटे की इस बातचीत में अमेरिका का नेतृत्व उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया और ईरान की तरफ से ईरानी संसद यानी मजलिस के प्रमुख मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने नेतृत्व किया।

खबरों के मुताबिक पहले दौर की बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञों ने सुरक्षा, राजनीति, सेना, अर्थव्यवस्था और कानून से जुड़े मुद्दों पर बात की। बताया गया है कि यह मीटिंग रविवार को भी जारी रह सकती है। गौरतलब है कि 47 साल पहले 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार था दोनों देश के शीर्ष नेताओं ने आमने सामने बैठ कर बातचीत की। वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने इस्लामाबाद में ईरान के प्रतिनिधियों से आमने सामने मुलाकात की है।

इससे पहले कहा जा रहा था कि पहले दौर की वार्ता मध्यस्थ के जरिए होगी। यानी पाकिस्तान के जरिए बातचीत होगी और एजेंडा फाइनल होने के बाद दोनों देशों के नेता एक साथ बैठेंगे। लेकिन दोनों पक्षों ने एजेंडा फाइनल करने के बाद पहले दौर की वार्ता आमने सामने बैठ कर की। इस्लामाबाद के लक्जरी सेरेना होटल में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता हो रही है। यह होटल शहर के सबसे सुरक्षित इलाकों में माना जाता है। इसके आसपास पाकिस्तान ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं।

बहरहाल, वार्ता शुरू होने से पहले ईरान ने कहा था कि अगर इस्लामाबाद में चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, तो सिर्फ इजराइल को दोष नहीं दिया जा सकता। इजराइल और अमेरिका के फैसले जुड़े हैं, इसलिए वार्ता फेल होने पर जिम्मेदारी अमेरिका पर भी होगी। दूसरी ओर अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि वे खुले दिन से वार्ता के लिए आ रहे हैं और ईरान को भी ईमानदारी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान कोई चालाकी नहीं करे तो वार्ता का सकारात्मक नतीजा निकल सकता है।

शनिवार को ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद पहुंचने के बाद एक्स पर एक फोटो शेयर की। इसमें विमान की सीटों पर चार बच्चों की तस्वीरें रखी हैं, जिनके साथ उनके खून से सने स्कूल बैग और जूते रखे हैं और फूल भी रखा है। गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के पहले दिन 28 फरवरी को मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ था, जिसमें 168 लोगों की मौत हुई थी। इनमें बच्चे और स्कूल का स्टाफ भी शामिल था।


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