नई दिल्ली। भारत के पास कच्चे तेल का भंडार कम हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास सिर्फ 25 दिन के कच्चे तेल और रिफाइंड का भंडार है। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। गौरतलब है कि भारत की जरुरत का करीब 40 फीसदी तेल होरमुज की खाड़ी से होकर आता है। इतना ही करीब 50 फीसदी एलएनजी और 80 फीसदी पीएनजी होरमुज की खाड़ी से आता है। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि भारत एलपीजी का स्टॉक नहीं रखता है। इसलिए होरमुज की खाड़ी बंद होने से सबसे पहले रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत सरकार के सूत्रों की ओर से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक भारत का स्टॉक 25 दिन का है। लेकिन सरकार अभी पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाएगी। इस बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से भारत ने व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि होरमुज की खाड़ी से भारत का करीब आधा तेल आयात गुजरता है और किसी भी बड़ी बाधा का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जंग के दौरान कुछ भारतीयों की मौत और लापता होने की खबरों पर भी चिंता जताई गई है। साथ ही भारत ने एक बार फिर जंग समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और राष्ट्रीय हित में आवश्यक फैसले किए जाएंगे।
गौरतलब है कि, ईरान ने होरमुज की खाड़ी को बंद करने का ऐलान किया है। साथ ही ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि इस रास्ते से अगर कोई भी जहाज गुजरता है, तो उसे आग लगा दी जाएगी। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता ओमान और ईरान के बीच स्थित है। वहां से दुनिया का 20 फीसदा तेल आयात होता है। यह रास्ता बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा।
माना जा रहा है कि होरमुज की खाड़ी का रास्ता बंद होने से विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक सौ डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। जंग शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत करीब 13 फीसदी बढ़ कर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। हालांकि भारत में आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि भारत सरकार का फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सरकार कीमतों को स्थिर रखना चाहती है। इसे लेकर सोमवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी।
