नई दिल्ली। एक और राज्य का नाम बदलने जा रहा है। अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता मे हुई कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को इस बारे में फैसला किया गया। अब इसे केरल विधानसभा की राय के लिए भेजा जाएगा। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में किया गया। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में शिफ्ट हुआ।
बहरहाल, सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें 12,236 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तीन रेल प्रोजेक्ट की मंजूरी सहित कुल आठ फैसले किए। कैबिनेट ने जिन तीन नए रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है उसमें गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन की डबलिंग, गम्हरिया-चांडिल और पुनारख-किऊल के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन शामिल है। इसके साथ ही श्रीनगर में एक नया एयरपोर्ट टर्मिनल बनाने और अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2बी के विस्तार का फैसला भी हुआ। बैठक में पावर सेक्टर में सुधारों पर नीति से जुड़ा फैसला भी हुआ।
इसी बैठक में केरल का नाम बदल कर केरलम करने के लिए लाए गए बिल को मंजूरी दी गई। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राष्ट्रपति केरल का नाम बदलने के बिल को संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत केरल विधानसभा की राय के लिए भेजेंगी। विधानसभा की राय मिलने के बाद, सरकार संसद में बिल पेश करेगी। संसद से पास होने पर राज्य का नाम आधिकारिक रूप से केरलम हो जाएगा। गौरतलब है कि केरल विधानसभा से 24 जून 2024 को प्रस्ताव पास हुआ था। इस प्रस्ताव के मुताबिक केरल का असल में मलयाली भाषा में नाम केरलम है। माना जा रहा है कि केरल की पहचान, भाषा, संस्कृति और विकास को बढ़ावा देने के लिए नाम बदला जा रहा है। इससे पहले उत्तरांचल का नाम उत्तराखंड और उड़ीसा का नाम ओडिशा किया गया था।
