मुंबई। महाराष्ट्र के 29 शहरी निकायों के लिए गुरुवार को वोटिंग होगी। इसमें बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी की 227 सीटें भी हैं। इस बार बीएमसी का चुनाव त्रिकोणात्मक हो रहा है और उद्धव व राज ठाकरे के लिए अस्तित्व का चुनाव है। 20 साल के बाद दोनों भाई साथ लड़ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिव सेना का गठबंधन है। तीसरा मोर्चा कांग्रेस का है, जो प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है।
शहरी निकाय के लिए प्रचार समाप्त हो चुका है और नेता मतदान की तैयारियों में जुटे हैं। 16 जनवरी को वोटों की गिनती होगी। उससे पहले प्रचार के आखिरी दिन उद्धव व राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा तो फड़नवीस और शिंदे ने ठाकरे बंधुओं पर हमला किया। गौरतलब है कि इस बार महाराष्ट्र का चुनाव मराठी मानुष और हिंदुत्व के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है। भाजपा और ठाकरे बंधु दावा कर रहे हैं कि मराठी बोलने वाला हिंदू ही मुंबई का मेयर बनेगा। इस बार के चुनाव की खास बात यह है कि सभी पार्टियां गठबंधन तोड़ कर किसी के साथ भी लड़ रही हैं। पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और परभणी में शरद और अजित पवार की पार्टी एक साथ लड़ रही है। अनेक शहरी निकायों में गठबंधन बिखरा हुआ है।
इससे पहले प्रचार के आखिरी दिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, ‘मैं राज ठाकरे को बताना चाहता हूं कि उद्धव ठाकरे ने राज्य में हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाने का फैसला किया’। उन्होंने कहा, ‘मुझ पर कमेंट करने की बजाय आपको उनसे पूछना चाहिए कि असली सच्चाई क्या है’। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन्हें मराठी मानुष की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
बहरहाल, दो गुटों में बंटने से पहले शिव सेना ने 1997 से 2022 तक यानी 25 साल तक बीएमसी को नियंत्रित किया। उद्धव ठाकरे को अपने पिता की विरासत बचाने के लिए बीएमसी का चुनाव जीतना जरूरी होगी। बीएमसे के साथ 28 और नगर निगमों के चुनाव हो रहे हैं। चुनाव में 15 हजार से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं, जहां 17 सौ उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। बीएमसी की 227 सीटों में से 32 सीटों पर कांग्रेस या उसके गठबंधन के उम्मीदवार नहीं हैं।
