नई दिल्ली। पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में तृणमूल कांग्रेस की संसद महुआ मोइत्रा को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने इस मामले में अभी आरोपपत्र दाखिल नहीं करेगी क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को लोकपाल की ओर से आरोपपत्र फाइल करने की मंजूरी को रद्द कर दिया है। यह मंजूरी 12 नवंबर को दी गई थी। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कहा है, ‘हमारा मानना है कि लोकपाल ने इस मामले में गलती की है’।
हाई कोर्ट ने लोकपाल से कहा है कि वह लोकपाल और लोकायुक्त कानून की धारा 20 के तहत एक महीने के भीतर कानून के अनुसार दोबारा फैसला करे। सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने कहा कि लोकपाल ने मंजूरी देते समय कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया। कानून के मुताबिक किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ मंजूरी देने से पहले उनकी टिप्पणी लेना जरूरी होता है, जो नहीं ली गई।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2023 में भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा पर महंगे उपहार और पैसे लेकर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के इशारे पर अडानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए लोकसभा में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। इसके बाद यह मामला लोकसभा की एथिक्स कमेटी में भेज दिया गया था, जहां पर महुआ दोषी पाई गई थीं। इसके बाद महुआ को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद मामला लोकपाल के पास पहुंचा। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिर लोकपाल में इस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा।
