भारत खिलाफ ट्रंप का वीजा वॉर

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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रही मुक्त व्यापार वार्ता के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बहुत बड़ा झटका दिया है। उन्होंने टैरिफ के बाद वीजा वॉर छेड़ दिया है। ट्रंप ने एच 1बी वीजा की सालाना फीस में औसतन 30 गुना की बढ़ोतरी कर दी है। इसकी सबसे बड़ी मार भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने एच 1बी वीजा की फीस बढ़ाने के आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं और बढ़ी हुई फीस रविवार यानी 21 सितंबर से लागू हो जाएगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार की रात को व्हाइट हाउस में इस आदेश पर दस्तखत किए। उन्होंने एच 1बी वीजा की फीस एक लाख डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए सालाना कर दी है। भारत के पेशेवर औसतन 66 हजार डॉलर सालाना पर अमेरिका में नौकरी करते हैं और अब एच 1बी वीजा के लिए उन्हें एक लाख डॉलर सालाना चुकाना होगा। अब तक एच 1बी वीजा की सालाना फीस एक लाख से छह लाख रुपए सालाना तक थी, जो आमतौर पर कंपनियों की ओर से दी जाती थी।

एच 1बी वीजा के अलावा ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रंरप प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉरपोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड’ जैसी सुविधाएं भी शुरू करने का ऐलान किया गया है। ट्रंप गोल्ड कार्ड की कीमत एक मिलियन डॉलर यानी करीब आठ करोड़ 80 लाख रुपए है। इसमें व्यक्ति को अमेरिका में हमेशा रहने का अधिकार देगा। बहरहाल, वीजा नियमों में किए गए इन बदलावों का विदेशी पेशेवरों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा भारत के पेशेवर होंगे। इस फैसले के बाद कंपनियां सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को अमेरिका बुलाएंगी, जिनके पास सबसे अच्छा स्किल होगा।

इस बीच अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि अभी हर साल करीब दो लाख 81 हजार लोगों को ग्रीन कार्ड दिया जाता है, लेकिन इनमें से ज्यादातर की औसत कमाई सिर्फ 66 हजार डॉलर यानी करीब 58 लाख रुपए होती है और कई बार वे सरकार की मदद पर भी निर्भर रहते हैं। लुटनिक ने कहा, ‘सभी कंपनियां एच 1बी वीजा के लिए सालाना एक लाख डॉलर देने के लिए तैयार हैं। हमने उनसे बात की है। अगर आप किसी को ट्रेनिंग देने जा रहे हैं, तो किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी से निकले ग्रेजुएट को ट्रेनिंग दीजिए। अमेरिकियों को ट्रेनिंग दीजिए। हमारी नौकरियां छीनने के लिए लोगों को बाहर से लाना बंद करिए

लुटनिक ने कहा कि गोल्ड कार्ड की भारी फीस यह तय करेगी कि अमेरिका में सिर्फ सबसे योग्य और टॉप क्लास कर्मचारी ही लंबे समय तक टिक सकें। उन्होंने कहा, ‘यह व्यवस्था पहले अनुचित थी, लेकिन अब हम सिर्फ उन्हीं को लेंगे जो वाकई बहुत काबिल हैं’। बताया गया है कि गोल्ड कार्ड अब तक चल रहे ईबी 1 और ईबी 2 वीजा की जगह लेगा। ये कार्ड केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो अमेरिका के लिए फायदेमंद माने जाएंगे।


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