उचित ही इसे असहज करने वाली रवायत का हिस्सा बताया गया है, जिसमें भारत विश्व मंचों पर आतंकवाद विरोधी मुहिम चलाता है, लेकिन भू-राजनीतिक दबाव में हाथ आए संदिग्ध आतंकवादियों को अपने यहां से जाने देता है।
म्यांमार से मणिपुर में घुस कर उग्रवादियों ने चार नगा नागरिकों की हत्या कर दी। इस घटना से मणिपुर में जारी हिंसा के साथ सीमा पार का पहलू जुड़े होने की फिर पुष्टि हुई है। ये वारदात उस समय हुई, जब अमेरिकी एजेंट मैथ्यू वॉनडाइक और छह यूक्रेनी ड्रोन विशेषज्ञों को भारत से बाहर जाने देने की इजाजत मिल गई है। इन सभी को इस वर्ष मार्च में संदिग्ध स्थितियों में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि ये सभी मणिपुर के रास्ते म्यांमार गए। इस मामले को भारत म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गतिविधियों और विदेशी हस्तक्षेप की शिकायत से जोड़ कर देखा गया। वॉनडाइक अमेरिकी भाड़े का सैनिक है, जो सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नामक विवादास्पद संस्था से जुड़ा है। लीबिया, सीरिया, इराक, और अफगानिस्तान जैसे युद्ध क्षेत्रों में उसकी भूमिका विवादास्पद रही है।
भारत में भी पहले उस पर आतंकवाद से जुड़ी धारा लगाई गई, लेकिन चार्जशीट पेश करते वक्त यूएपीए हटा दिया गया। विपक्ष एवं कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस पर कड़ा एतराज जताया था। उनका इल्जाम है कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हस्तक्षेप के कारण भारत सरकार ने इन लोगों पर नरमी बरती। बीते मई मे भारत यात्रा के समय अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ये मामला उठाया था। विश्लेषकों ने उचित ही इस कांड को उस लंबी और असहज करने वाली रवायत का हिस्सा माना है, जिसमें भारत अपने सख्त कानूनों का हवाला तो देता है, और विश्व मंचों पर आतंकवाद विरोधी मुहिम चलाता है, लेकिन भू-राजनीतिक दबाव पड़ते ही हाथ आए संदिग्ध आतंकवादियों को दंडित करने से पीछे हट जाता है।
खुद भारतीय अदालत में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक वॉनडाइक का गुट बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है, जो तस्करी कर ड्रोन्स भारत लाता था और फिर उन्हें म्यांमार भेजता था। इसके पहले भोपाल गैस लीक कांड में यूनियन कारबाइड के चेयरमैन वॉरेन एंडरसन, पुरुलिया में हथियार गिराने के आरोपियों, और केरल में भारतीय मछुआरों के हत्यारे इटली के दो नौसैनिकों के प्रति भी ऐसी नरमी बरती गई थी। ये तमाम घटनाएं भारतीय राज्य के सॉफ्ट (कमजोर) बने रहने की दुर्भाग्यपूर्ण मिसाल हैं।
