हर रोज नई ऊंचाई

Categorized as संपादकीय

सोने और चांदी की कीमतों में जबर्दस्त उछाल का सीधा संबंध विश्व अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल से है, जिससे दुनिया की आर्थिक, वित्तीय, एवं मौद्रिक व्यवस्थाओं में दीर्घकालिक परिवर्तन की संभावना ठोस रूप ले रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव नाटकीय ढंग से बढ़ रहा है। इस गति की अपेक्षा उन लोगों को भी नहीं थी, जो अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मुद्रा के रूप में डॉलर के भविष्य को लेकर आशंकित रहे हैं। सोमवार को न्यूयॉर्क में प्रति औंस सोने का भाव 5000 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत में प्रति दस ग्राम सोने की कीमत एक लाख 66 हजार रुपये से अधिक हो गई है। इसी के साथ चांदी के भाव में बेहद तेज उछाल आया है। सोमवार को भारत में प्रति किलोग्राम चांदी का भाव तीन लाख 60 हजार रुपये से अधिक दर्ज किया गया।

इन दोनों धातुओं की कीमत में जबर्दस्त उछाल का सीधा संबंध विश्व अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल से है, जिससे वैश्विक आर्थिक, वित्तीय एवं मौद्रिक व्यवस्थाओं में दीर्घकालिक परिवर्तन की संभावना ठोस रूप ले रही है। वैसे तो यह ट्रेंड कई साल पहले शुरू हो गया था, लेकिन 2025 में विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंकों के सोना खरीदने की होड़ काफी तेज हो गई। ऐसा पहली बार हुआ है कि सभी देशों को मिला कर देखें, तो उनके सेंट्रल बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद सोने की कीमत उनके भंडार में मौजूद डॉलर की कीमत से अधिक हो गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय भुगतान में डॉलर अब भी सबसे बड़ा माध्यम है, लेकिन आनुपातिक रूप से इसके हिस्से में गिरावट आई है।

इस बीच डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों ने डॉलर को लेकर निवेशकों में अविश्वास और बढ़ाया है, जिस वजह से वे डॉलर संपत्तियां बेच कर सोना और चांदी खरीद रहे हैं। उनमें यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि देर-सबेर गोल्ड स्टैंडर्ड वापस आएगा, जिसमें मुद्राओं की कीमत संबंधित देश के भंडार में मौजूद सोने से तय होगी। जिंबाब्वे ने अपनी मुद्रा को स्वर्ण से जोड़ कर मुद्रास्फीति दर घटाने में अप्रत्याशित सफलता पाई है। इससे यह संदेश मजबूत हुआ है कि दुनिया एक बड़े बदलाव के मुहान पर है। मगर इस परिघटना का सबसे ज्यादा नुकसान भारत जैसे देशों के आम लोगों को हुआ है। सोना हर रोज उनकी पहुंच से और अधिक बाहर होता जा रहा है।


Previous News Next News

More News

कांग्रेस के अजब गजब उम्मीदवार

March 6, 2026

कांग्रेस पार्टी को इस बार राज्यसभा की एक सीट का फायदा हो रहा है। वह इसलिए हो रहा है क्योंकि एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से एक सीट देने का फैसला किया। कांग्रेस पार्टी के नेता दिखावा करने के लिए पवन खेड़ा का नाम ले रहे थे। सबको पता था कि अगर तमिलनाडु से कांग्रेस को…

कबूतरी संचार की पुरानी व्यवस्था

March 6, 2026

ओडिशा पुलिस की यह सेवा अनूठी है। 1946 में, द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद, ओडिशा पुलिस ने इसे शुरू किया। सबसे पहले नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे यह 38 स्थानों (जिलों, सब-डिवीजनों, सर्कलों और पुलिस स्टेशनों) तक फैल गई। इस सेवा के चरम पर 19 ‘पिजन लॉफ्ट’ सक्रिय थे, जहां…

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

March 6, 2026

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक…

बेहतर विदाई के हकदार थे नीतीश

March 6, 2026

बिहार में नीतीश कुमार युग का अंत हो गया है। इसमें कोई हैरानी या दुख की बात नहीं है। हर नेता का युग आता है और समाप्त होता है। बिहार में ही जैसे लालू प्रसाद का युग खत्म हुआ वैसे ही नीतीश का भी खत्म हुआ। फर्क इतना है कि लालू प्रसाद चुनाव हार कर…

नीतीश सीएम पद छोड़ेंगे

March 6, 2026

पटना। दो दशक के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके साथ मौजूद रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने एक लंबी पोस्ट लिख कर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा…

logo