बुजुर्गों को पेंशन मिले, यह कल्याणकारी सोच है। मगर ऐसी सामाजिक सुरक्षा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को क्यों मिलनी चाहिए? सरकारी कर्मचारियों को एक अलग सुविधा-प्राप्त वर्ग के रूप में रखने के प्रयासों के दुष्परिणाम पहले भी सामने आ चुके हैं।
बिहार की तर्ज पर असम सरकार ने भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खाते में रुपया भेजने की योजना घोषित की है। वहां इसे मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना कहा जाएगा। इसके तहत 37 लाख महिलाओं के खाते में 8000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। इससे लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ राज्य के खजाने पर आएगा। अगले अप्रैल- मई में विधानसभा चुनाव तमिलनाडु में भी होना है। तो वहां सरकार ने पहले अपने कर्मचारियों को लुभाने की योजना घोषित की है। तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिटायर्ड होने वाले राज्य सरकार के हर कर्मचारी को कम से कम अपने आखिरी वेतन का 50 फीसदी हिस्सा बतौर पेंशन मिले।
इसके लिए कर्मचारी को सिर्फ दस फीसदी योगदान करना होगा। अतिरिक्त सारा बोझ राज्य सरकार उठाएगी। साथ ही रिटायर हो रहे कर्मचारियों को 25 लाख रुपये तक ग्रैच्युटी मिले, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। फिलहाल इन योजनाओं से राज्य सरकार पर 13 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। चूंकि पेंशन की रकम महंगाई दर के अनुपात में बढ़ेगी, इसलिए यह खर्च हर गुजरते वर्ष के बढ़ता जाएगा। कहना कठिन है कि सरकारी कर्मचारियों को खुश करने की इस कोशिश का कितना चुनावी लाभ सत्ताधारी डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिलेगा, मगर इस प्रयास में जो देनदारी बनेगी, उसका बोझ आने वाली सभी सरकारों को उठाना होगा।
पेंशन के रूप में बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा मिले, यह कल्याणकारी सोच है। मगर ऐसी सुरक्षा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को क्यों मिलनी चाहिए? सरकारी कर्मचारियों को एक अलग सुविधा-प्राप्त वर्ग के रूप में रखने के प्रयासों के दुष्परिणाम पहले सामने आ चुके हैं। उसका समाधान नई पेंशन व्यवस्था से ढूंढा गया था। तमिलनाडु सरकार (इसके कुछ अन्य उदाहरण भी हैं), उस व्यवस्था को पलटने जा रही है। चुनाव से ठीक पहले ऐसा कदम समस्याग्रस्त है। बेहतर नजरिया यह होता कि समाज के सभी तबकों को न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में कदम उठाया जाता। आखिर सरकारी कर्मचारी भी समाज की ही हिस्सा हैं। उन्हें अलग वर्ग में रखकर राजनीतिक दल खराब मिसाल पेश कर रहे हैं।
