सुझाव काबिल-ए-गौर है

Categorized as संपादकीय

बेहतर होगा कि नेहरू और पूर्व तमाम सरकारों ने जो गलत किया उन पर दो अलग-अलग श्वेत पत्र निकाले जाएं। उससे देश अतीत में उलझी बहसों से बाहर निकल सकेगा। फिर आज की गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित चर्चा हो सकेगी।

वंदे मातरम पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने, शायद कटाक्ष में, लेकिन सटीक सुझाव दिया। उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। गांधी ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेता लगातार जवाहर लाल नेहरू की गलतियां निकालते हैं। तो क्यों ना इस विषय पर सत्ता पक्ष के मनमुताबिक समय तय करते हुए संसद में पूरी चर्चा कर ली जाए। बल्कि सुझाव को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा जा सकता है कि संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार के पहले की तमाम सरकारों की गलतियों पर खुल कर चर्चा हो। बेहतर तो यह होगा कि नेहरू और पूर्व तमाम सरकारों ने जो गलत किया या जो सही नहीं किया, उन पर दो अलग-अलग श्वेत पत्र निकाले।

उन श्वेत पत्रों को राष्ट्रीय अभिलेखागार में रख लिया जाए। लाभ यह होगा कि उसके बाद देश अतीत में उलझी बहसों से बाहर निकल सकेगा। फिर आज की गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित चर्चा हो सकेगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुछ रोज पहले एक दीक्षांत समारोह में कहा कि इस समय अमेरिका और चीन दोनों अपने मनमाफिक अंतरराष्ट्रीय नियम थोप रहे हैं। इसके बीच भारत मुश्किल में फंसा हुआ है। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि ‘पूर्व सरकारों ने भारत में औद्योगिक ढांचा बनाने पर ध्यान नहीं दिया।’ जयशंकर ने कहा कि जिसके पास यह ताकत है, वह दुनिया पर प्रभुत्व जमा रहा है। तो जयशंकर ने आज की विफलताओं की भी पूरी जिम्मेदारी अतीत पर डाल दी।

जाहिर है, यह इस पूरी सरकार का नजरिया है। मगर देश के सामने सवाल है कि अतीत में जो हुआ, सो हुआ- अब क्या किया जाए? आखिर अतीत के सत्ताधारियों को जनता ने इसीलिए उनकी आज की हैसियत में पहुंचाया है, क्योंकि उन्होंने देश की अपेक्षाएं पूरी नहीं कीं। इनसे संबंधित सारी बातें सहज स्वीकार की जाएंगी। मगर इन व्यर्थ बहसों से देश को छुटकारा मिलना चाहिए। इसलिए एक बार पूरी बात हो जाए। मगर यह तभी संभव है, अगर वर्तमान सत्ताधारियों की मंशा तुच्छ सियासत से ना प्रेरित हो। ऐसा नहीं है, यह साबित करने का दायित्व उन पर ही है।


Previous News Next News

More News

ईरान युद्ध का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?

March 4, 2026

पुरानी कहावत है कि ‘चुनाव से पहले, युद्ध के दौरान और शिकार के बाद सबसे ज्यादा झूठ बोले जाते हैं’। सो, ईरान में युद्ध चल रहा है और झूठ की चौतरफा बौछार हो रही है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि युद्ध अमेरिका ने शुरू नहीं किया…

भारत तेल भंडार की चिंता में

March 4, 2026

नई दिल्ली। भारत के पास कच्चे तेल का भंडार कम हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास सिर्फ 25 दिन के कच्चे तेल और रिफाइंड का भंडार है। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। गौरतलब है कि भारत की जरुरत का करीब 40…

ट्रंप ने दांवा किया ईरान बातचीत चाहता है

March 4, 2026

नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के चौथे दिन मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है लेकिन अब बहुत देर हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की वायु और नौसैनिक क्षमता पूरी तरह से खत्म हो गई…

ईरान में आठ सौ लोगों की मौत

March 4, 2026

नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले में पिछले चार दिन में करीब आठ सौ लोगों की मौत हो चुकी है। पहले दिन हुए हमले में एक स्कूल में करीब डेढ़ सौ छात्राओं की मौत हो गई थी। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुआ।…

पटरी पर लौटा रिश्ता

March 4, 2026

मार्क कार्नी की सोच है कि जब बड़ी ताकतें अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के कायदों को ठोकर मार रही हैं, मध्यम दर्जे की ताकतों को आपस में मिलकर अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। भारत यात्रा में उनकी ये सोच प्रतिबिंबित हुई। मार्क कार्नी की भारत यात्रा का सार है कि नए हालात के बीच भारत और…

logo