अगर ऐसा सचमुच हुआ

Categorized as संपादकीय

कलबुर्गी स्थित जिस कॉल सेंटर की सेवा इसके लिए ली गई, उसे मतदाता के नाम को काटने की हर अर्जी के लिए 80 रुपए दिए गए। दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच ऐसी कुल 6,018 अर्जियां दी गईं।

कर्नाटक पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) इस नतीजे पर पहुंचा है कि राज्य के अलांद विधानसभा क्षेत्र में 2023 के चुनाव से पहले नियोजित ढंग से मतदाताओं के नाम मतदाता कटवाए गए। ऐसा ऑनलाइन माध्यम से हुआ। एसआईटी इस निष्कर्ष पर है कि कलबुर्गी स्थित जिस कॉल सेंटर की सेवा इसके लिए ली गई, उसे मतदाता के नाम को काटने की हर अर्जी के लिए 80 रुपए दिए गए। दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच ऐसी कुल 6,018 अर्जियां दी गईं। इस तरह कुल लगभग 4.80 लाख रुपये का भुगतान किया गया। संदेह है कि यह रकम 2023 में अलांद सीट पर पराजित हुए भाजपा उम्मीदवार सुभाष गुट्टेदार की तरफ से दी गई। कर्नाटक पुलिस ने पिछले हफ्ते गुट्टेदार के घर पर छापा मारा था।

बहरहाल, सिर्फ 24 ऐसे वास्तविक मतदाताओं की पुष्टि हुई है, जिनके नाम इस प्रयास के कारण मतदाता सूची से हटे। बाकी मतदाता पहले ही उस क्षेत्र से जा चुके थे- यानी उनका नाम कटना जायज ही था। मगर 24 मतदाताओं के नाम कटना भी बड़ा मुद्दा है। इससे पुष्टि होती है कि इस तरह के सुनियोजित प्रयास हुए और ऐसा ऑनलाइन माध्यम से तीसरे पक्ष की तरफ से किया गया। यही इल्जाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लगाया था। उनके आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग ने यह अनिवार्य कर दिया है कि किसी मतदाता का नाम काटने की अर्जी सिर्फ आधार से जुड़े मोबाइल फोन नंबर से ही दी जा सकेगी।

इस तरह उम्मीद जगी है कि भविष्य में इस तरह की “वोट चोरी” को रोका जा सकेगा। परंतु, जैसाकि बाद में राहुल गांधी ने कहा था, पहले हुई “वोट चोरी” की सच्चाई सामने आनी चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसके लिए निर्वाचन आयोग ने पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाई है। उससे अपेक्षित है कि कर्नाटक एसआईटी जांच में पूरा सहयोग करे और इस प्रकरण को इसके अंजाम तक पहुंचाए। भारत की चुनाव प्रक्रिया पर पहले से कई सवाल हैं। “वोट चोरी” के आरोप से उसमें एक और संगीन पहलू जुड़ा। संदेह के ये सायों को तुरंत नहीं हटे, तो उसके गंभीर नतीजे हो सकते हैँ।


Previous News Next News

More News

विपक्ष कैसे रोक देता है सरकार को?

April 23, 2026

सरकार अपने जिस एजेंडे को लागू करने में किसी भी कारण से विफल हो जाती है उसके बारे में कहा जाता है कि विपक्ष ने और खास कर कांग्रेस ने नहीं करने दिया। दूसरी प्रादेशिक पार्टियों पर भी ठीकरा फोड़ा जाता है। हैरानी की बात है कि सरकार इतनी शक्तिशाली है, जिसने तमाम विवादित मुद्दों…

बिहार में कांग्रेस की मुश्किल

April 23, 2026

बिहार में कांग्रेस पार्टी के छह विधायक जीते थे। चुनाव नतीजों के कुछ दिन बाद राहुल गांधी ने सभी विधायकों को दिल्ली बुला कर एक बैठक की थी और कहा गया था कि जल्दी ही विधायक दल का नेता चुना जाएगा। लेकिन पांच महीने बाद भी कांग्रेस ने विधायक दल का नेता नहीं चुना है।…

ममता को बाहरी वोट की चिंता क्यों?

April 23, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी इस बार परेशान बताई जा रही हैं। लेकिन कोलकाता के जानकार लोगों के कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव में वे परेशान होती हैं लेकिन अंत में जीत उनकी होती है। अब पता नहीं चार मई को नतीजा क्या…

स्टालिन को सहयोगियों से मदद नहीं

April 23, 2026

तमिलनाडु में एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके सबसे ज्यादा भरोसे में है। पार्टी जीत के प्रति आश्वस्त है। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि को यह अंदाजा है कि इस बार पहले जितनी सीटें नहीं आ रही हैं। पिछली बार डीएमके ने 133 सीट अकेले जीती थी। उसने…

चेतना संचार और पतितपावनी गंगा

April 23, 2026

वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है, गंगा के दूसरे जन्म का प्रतीक पर्व है। कथा के अनुसार जब गंगा ने ऋषि जह्नु के यज्ञ स्थल को जलमग्न कर दिया, तो उन्होंने क्रोध में गंगा को पी लिया और बाद में अपने कान से उन्हें पुनः बाहर निकाला। यह प्रसंग…

logo