माओवाद का पराभव

Categorized as संपादकीय

यह बहस का मुद्दा है कि माओवाद का पराभव सिर्फ सरकारी नजरिया बदलने के कारण हुआ है, या अतिवादी रणनीति तथा भारतीय राज्य के चरित्र एवं समाज की समझ संबंधी गलतियां माओवादियों को इस मुकाम तक ले आई हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के हाथों भारतीय संविधान की कॉपी ग्रहण कर वरिष्ठ माओवादी नेता मालोजुला वेणुगोपाल राव और उनके 60 अन्य साथियों ने समर्पण कर दिया। इसके साथ ही फड़णवीस ने एलान किया कि उत्तर गढ़चिरौली से माओवाद का खात्मा हो गया है, जबकि दक्षिण गढ़चिरौली में इसका थोड़ा-बहुत प्रभाव बाकी है। उधर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि देश में अब ‘वामपंथी चरमपंथ’ से अति ग्रस्त जिलों की संख्या  महज तीन रह गई है, जबकि 2025 के आरंभ में यह छह थी। साधारण तौर पर ‘वामपंथी चरमपंथ’ से ग्रस्त जिलों की संख्या 18 से घट कर 11 रह गई है। गुजरे एक साल में सैकड़ों माओवादी मारे गए हैं, गिरफ्तार हुए हैं या उन्होंने समर्पण कर दिया है।

समर्पण करने वालों में कई बड़े चेहरे शामिल हैं, जिन पर करोड़ों रुपयों का इनाम घोषित था। तो इस तरह भाजपा सरकारें यह कहने की स्थिति में हैं कि ‘वामपंथी चरमपंथ’ को कानून-व्यवस्था की समस्या मानने का उनका नजरिया सही साबित हुआ है। कभी माओवादी पशुपतिनाथ (नेपाल) से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) तक लाल कॉरिडोर बनाने के प्रयास में जुटे हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘वामपंथी चरमपंथ’ को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। मगर अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह दावा सच होने के करीब है कि फरवरी 2026 तक माओवाद का सफाया हो जाएगा।

बहरहाल, यह बहस का मुद्दा है कि माओवाद का यह पराभव सिर्फ सरकारी नजरिया बदलने के कारण हुआ है, या भारतीय राज्य के चरित्र एवं समाज की समझ संबंधी गलतियां माओवादियों को इस मुकाम तक ले आई हैं। विचारणीय है कि क्या राजनीति में अतिवादी दृष्टिकोण अपनाना और भारतीय राज्य के खिलाफ हर सामाजिक विभाजन रेखा का लाभ उठाने की उनकी रणनीति उनके लिए घातक साबित हुई? इस रणनीति के तहत धीरे-धीरे वे पहचान की राजनीति के इर्द-गिर्द गोलबंदी करने की हद तक चले गए, जिससे वे एक बंद गली में पहुंचे। इसी समय सरकार के नजरिए में आया बदलाव उन पर भारी पड़ा। नतीजा यह हुआ कि आखिरकार संवैधानिक दायरे के अंदर आने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ा है।


Previous News Next News

More News

कांग्रेस के अजब गजब उम्मीदवार

March 6, 2026

कांग्रेस पार्टी को इस बार राज्यसभा की एक सीट का फायदा हो रहा है। वह इसलिए हो रहा है क्योंकि एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से एक सीट देने का फैसला किया। कांग्रेस पार्टी के नेता दिखावा करने के लिए पवन खेड़ा का नाम ले रहे थे। सबको पता था कि अगर तमिलनाडु से कांग्रेस को…

कबूतरी संचार की पुरानी व्यवस्था

March 6, 2026

ओडिशा पुलिस की यह सेवा अनूठी है। 1946 में, द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद, ओडिशा पुलिस ने इसे शुरू किया। सबसे पहले नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे यह 38 स्थानों (जिलों, सब-डिवीजनों, सर्कलों और पुलिस स्टेशनों) तक फैल गई। इस सेवा के चरम पर 19 ‘पिजन लॉफ्ट’ सक्रिय थे, जहां…

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

March 6, 2026

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक…

बेहतर विदाई के हकदार थे नीतीश

March 6, 2026

बिहार में नीतीश कुमार युग का अंत हो गया है। इसमें कोई हैरानी या दुख की बात नहीं है। हर नेता का युग आता है और समाप्त होता है। बिहार में ही जैसे लालू प्रसाद का युग खत्म हुआ वैसे ही नीतीश का भी खत्म हुआ। फर्क इतना है कि लालू प्रसाद चुनाव हार कर…

नीतीश सीएम पद छोड़ेंगे

March 6, 2026

पटना। दो दशक के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके साथ मौजूद रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने एक लंबी पोस्ट लिख कर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा…

logo