हर साल, घड़ी की तरह, हंगामा फिर शुरू है। दीया बुझा भी नहीं होता कि नसीहत, प्रवचन बरसने लगे हैं। हवा के प्रदूषण के एक्यूआई (AQI) चार्ट टाइमलाइन पर आ गए हैं। नैतिक भाषण पैनलों पर भर जाते हैं, और वही परिचित एलिट- अभिजात वर्ग का कोरस फिर मंच पर है। हर दिन बढ़ता शोर… Continue reading दीवाली क्यों अपनी ख़ुशी के लिए माफ़ी मांगे?
