भारतीय परंपरा में जीवन में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास चारों ही आश्रम आवश्यक, महत्वपूर्ण और श्रमशील, कर्मप्रधान माने गये हैं। गृहस्थ सत्य है। सन्यास भी सत्य है। जीवन के दो पक्ष हैं। संसार के भोगों से पूर्वजन्म में ही निवृत्ति प्राप्त कर लेने वाला व्यक्ति इस जन्म में इस ओर रुचि नहीं रखता। लेकिन… Continue reading ज्ञानवान होना ही मोक्ष की परम प्राप्ति
