ज्ञानवान होना ही मोक्ष की परम प्राप्ति

भारतीय परंपरा में जीवन में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास चारों ही आश्रम आवश्यक, महत्वपूर्ण और श्रमशील, कर्मप्रधान माने गये हैं। गृहस्थ सत्य है। सन्यास भी सत्य है। जीवन के दो पक्ष हैं। संसार के भोगों से पूर्वजन्म में ही निवृत्ति प्राप्त कर लेने वाला व्यक्ति इस जन्म में इस ओर रुचि नहीं रखता। लेकिन… Continue reading ज्ञानवान होना ही मोक्ष की परम प्राप्ति

कांग्रेस के संगठन साल में भी संगठन जीरो!

गजब की नकल कर रही है कांग्रेस बीजेपी की। बीजेपी ने जब नया आफिस बनाया तो उसने भी पहले पत्रकारों की एन्ट्री सीमित कर रखी थी। मगर जब कांग्रेस ने उसकी नकल की तो बीजेपी ने एन्ट्री खोल दी। मगर कांग्रेस पता नहीं क्या छुपा रही है, है क्या उसके पास छुपाने के लिए कि… Continue reading कांग्रेस के संगठन साल में भी संगठन जीरो!

संघ-परिवार: कुर्सी का बीमार

संघ परिवार के सर्वोपरि लोगों ने पुनः अपनी पुरानी बीमारी — पर-उपदेश कुशलता — का प्रदर्शन किया। साथ ही, किसी के साथ भी छल, यहां तक कि अपने सहयोगियों से भी। अपने ऊपर उपकार करने वालों से भी। किसलिए? केवल निजी स्वार्थ में, जिस में समाज या देश-हित का बहाना भी दिखाना कठिन है। अभी-अभी… Continue reading संघ-परिवार: कुर्सी का बीमार

टीवी बहस के नाम पर जो है वह

एक शोध के अनुसार, टीवी पर बहस में एंकरों द्वारा आक्रामक लहजे का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक होता है, जो दर्शकों पर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है। ये आंकड़े बताते हैं कि बहसें अब सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि प्रचार का हथियार बन चुकी हैं। … भारत की टीवी बहसें लोकतंत्र का मजाक बन… Continue reading टीवी बहस के नाम पर जो है वह

राष्‍ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान आवश्यक

राष्ट्र प्रतीक देश के इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े होते हैं, जो अतीत से वर्तमान तक उनके रहस्यों, उनकी गहराइयों को दर्शाते हैं।अशोक चिह्न भारत का राजकीय प्रतीक है। यह भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास से जुड़ा हुआ है। इसको सारनाथ में प्राप्त राष्ट्रीय स्तंभ अर्थात अशोक स्तंभ (लाट) से लिया गया… Continue reading राष्‍ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान आवश्यक

‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

सवाल है कि भारत के राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ को हजरतबल दरगाह की शिलापट्ट पर वांछित सम्मान क्यों नहीं मिला? इसकी असली वजह इस्लाम-पूर्व सांस्कृतिक विरोध में निहित है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसी मानसिकता से उपजे बिना जड़ों के वे देश हैं जहां के लोग मौलिक सनातन जड़ों से कटकर स्वयं को अरब और… Continue reading ‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

नेपाल बार-बार दिखाता है कि सत्ता और जनता का रिश्ता संविधान से नहीं, सड़कों पर गिरते लहू, आंसुओं और टूटती आवाज़ों से मापा जाता है। तराई से पहाड़ तक पथराव हुआ, गोलियां चलीं और लाठियां टूटीं। यह विरोध केवल आज का नहीं है; यह उन असंतोषों की कड़ी है, जो कभी मधेश आंदोलन, कभी जातीय… Continue reading नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

अक्सर देखा गया है कि समाज में नई उम्मीदें जन्म लेती हैं। ऐसी बहसें यह भरोसा बंधाती हैं कि मानव प्रयास से एक अलग, नए किस्म की दुनिया का निर्माण संभव है। जबकि ऐसे प्रयासों के अभाव में लोग हताशा का शिकार होते हैं, जैसा श्रीलंका, नेपाल, या बांग्लादेश में हुआ है। अनुभव यह है… Continue reading वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

सिक्किम में धूमधाम से मनेगा मोदी का जन्मदिन

सुदूर सिक्किम में उनका जन्मदिन भविष्य की उम्मीदों के साथ मनाया जाएगा। सिक्किम के मुख्यमंत्री  प्रेम सिंह तामंग (गोले) ने प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन के अवसर पर अनेक प्रकार के उत्सवों की तैयारी की है। सिक्किम के लिए यह सिर्फ उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि इस अवसर पर जन कल्याण की अनेक योजनाएं आरंभ… Continue reading सिक्किम में धूमधाम से मनेगा मोदी का जन्मदिन

आम आदमी का हीरो: ‘इंस्पेक्टर झेंडे’

मनोज बाजपेयी इस फिल्म का सबसे मजबूत पहलू हैं, उन्होंने इंस्पेक्टर जेंडे के किरदार को बहुत ही शिद्दत से निभाया है। मनोज की एक्टिंग में सख्ती भी है और हल्की-फुल्की हंसी भी। सबसे अच्छी बात यह है कि उनकी कॉमिक टाइमिंग बिल्कुल नैचुरल लगती है, कहीं भी ओवरएक्टिंग महसूस नहीं होती है। कई जगह उनका… Continue reading आम आदमी का हीरो: ‘इंस्पेक्टर झेंडे’

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