महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन कर रही भाजपा सरकार : अखिलेश यादव

Categorized as प्रादेशिक समाचार

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र में शामिल होने पहुंचे विपक्ष के नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

समाजवादी पार्टी के सांसद और अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा, “भारतीय जनता पार्टी के फैसलों को समझना बहुत मुश्किल है। जब उन्होंने कहा था कि एसआईआर होगा और वोटरों के नाम हटाए जाने से रोके जाएंगे, उस समय एसआईआर की आड़ में एनआरसी लागू किया जा रहा था। अब महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन कर रहे हैं।

अखिलेश ने कहा, “हम ‘डबल-इंजन सरकार’ मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन-डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं। हालांकि, नोएडा में न्यूनतम मजदूरी देश में सबसे कम में से एक बनी हुई है। इस समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? मजदूरों की मजदूरी क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है? इसे कौन रोक रहा है? इसका मतलब है कि आप कुछ खास लोगों के साथ मिले हुए हैं और सिर्फ उन्हीं को फायदा पहुंचाना चाहते हैं।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “हम जानते हैं कि सबसे जरूरी बात यह है कि महिलाएं सदन में आकर बैठें। लेकिन हाथी के दांत दिखाने के कुछ और होते हैं और खाने के कुछ और। ठीक इसी तरह, सरकार करती कुछ और दिख रही है, लेकिन दिखा कुछ और रही है।

Also Read : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए : राजनाथ सिंह

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, “मौजूदा भ्रम की स्थिति में, ऐसा लगता है कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए काम करने की कोशिश कर रही है। अगर हम महिला आरक्षण बिल की बात करें, जैसा कि हमारी नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को सदन में साफ़ तौर पर कहा था, अगर आपकी नीयत साफ़ है और आपकी इच्छा ईमानदार है और अगर आप सचमुच इसे लागू करना चाहते हैं, तो आपके पास पहले से ही पूरे विपक्ष और कांग्रेस पार्टी का समर्थन है। आप मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही एक-तिहाई आरक्षण लागू कर सकते हैं, तो फिर दिक्कत क्या है?

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “परिसीमन देश की संवैधानिक संरचना, केंद्र और राज्यों के बीच के संबंधों पर असर डालेगा। जिस तरह से परिसीमन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका जो विकृत रूप कश्मीर और असम के मुद्दों में देखने को मिला है, वह गंभीर चिंताएं पैदा करता है। इसके बाद, जो कोई भी सचमुच भारत माता से प्रेम करता है, उसके लिए इस सरकार पर भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा।

प्रमोद तिवारी ने आगे कहा, “हमारा कहना है कि 2023 में पारित अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को मंजुरी दी गई थी। हम चाहते थे कि इसे 2024 से ही लागू किया जाए, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जहां तक मौजूदा स्थिति का सवाल है, जब इसे पहले ही लागू किया जा चुका है, तो इसे फिर से क्यों लाया गया है?

Pic Credit : ANI


Previous News Next News

More News

जनता दल यू का मतलब नीतीश कुमार है

September 17, 2026

बिहार में इन दिनों नाम बदलने की चर्चा जोरों पर है। एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानी हम के नेता व राज्य सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम बदल कर नीतीश पुर रख देने चाहिए। ध्यान रहे सुमन केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे हैं और…

पंजाब में क्या कामयाब होंगे पायलट

September 17, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि क्या सचिन पायलट को पंजाब में कामयाबी मिलेगी? ध्यान पहे 2018 में जब राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीती थी तब सचिन पायलट प्रदेश अध्यक्ष थे और सब मानते हैं कि उन्होंने बड़ी मेहनत की थी। हालांकि वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। उसके बाद कुछ विवादों…

सीजेपी का बड़ा डर है

September 17, 2026

ऐसा लग रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने न सिर्फ युवाओं के प्रदर्शन का तरीका बदला है, बल्कि उसके असर को कोई गुना बढ़ा दिया है। केंद्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें हों या न्यायपालिका और प्रशासन हो, सब कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों व युवाओं की चिंता कर रहे हैं। नेताओं…

भारत व पाक युद्धपोत में टक्कर

September 17, 2026

नई दिल्ली। उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के पोत पीएनएस ‘हुनैन’ के बीच टक्कर के बाद भारत ने बुधवार को पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के आचरण को ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर’ बताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार…

25 हजार रु प्रति माह वेतन तक पीएफ

September 17, 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं। नई सीमा…

logo