ऐसा लग रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने न सिर्फ युवाओं के प्रदर्शन का तरीका बदला है, बल्कि उसके असर को कोई गुना बढ़ा दिया है। केंद्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें हों या न्यायपालिका और प्रशासन हो, सब कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों व युवाओं की चिंता कर रहे हैं। नेताओं में तो सीजेपी के खौफ बन गया है। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में पार्टियों और नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। वहां सीजेपी ने स्कूलों को लेकर जो अभियान शुरू किया, उसका बड़ा असर चुनाव नतीजों में दिखा है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में निर्दलीय जीते हैं। निर्दलीय व अन्य को 23 सौ से ज्यादा सीटें मिली हैं और कुल 31 फीसदी वोट मिले हैं।
ऐसे ही पिछले दिनों नोएडा के एक मजिस्ट्रेट ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में एक छात्र को नोटिस जारी कर दिया था तो मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया। सोचें, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ इस बात का जिक्र किया कि सर्वोच्च अदालत की ओर से सारे एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया गया है लेकिन मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कर दिया तो उस पर चीफ जस्टिस ने बड़ी नाराजगी जताई और उसके अगले दिन मजिस्ट्रेट निलंबित हो गए। नोएडा में ही एक प्रदर्शनकारी छात्रों को नोटिस देने के मामले में एक पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक सरकारों ने स्कूलों की सुधार के लिए फंड जारी किया है वह अलग है। जाहिर है कि सीजेपी ने सबके अंदर चिंता या डर बैठा दिया है।
