देश में बहुत सारी चीजें पहली बार हो रही हैं। यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारी औऱ कर्मचारी किसी कानून का विरोध करने के लिए अदालत पहुंचे हैं। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी पहले भी सरकार की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। वे हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता लेते हैं। उसमें भी सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की ओर से हड़ताल या प्रदर्शन की खबर नहीं के बराबर आती है। लेकिन केंद्र सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया है, जिसके विरोध में अर्धसैनिक बलों के करीब तीन हजार लोग, जिनमें अधिकारी और जवान सब शामिल हैं, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
असल में पिछले दिनों केंद्र सरकार ने कानून बना कर यह प्रावधान किया है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईजी स्तर के 50 फीसदी, एडीजी स्तर के 67 फीसदी और डीजी स्तर के सौ फीसदी अधिकारी आईपीएस होंगे। इसका अर्थ है कि अर्धसैनिक बल का कोई भी अधिकारी डीजी नहीं बन पाएगा। गौरतलब है कि पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों के कैडर के अधिकारियों को प्रमोशन देने और सर्वोच्च पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश को पलटने के लिए केंद्र सरकार ने कानून बना दिया। अब सेवारत अधिकारी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि सर्वोच्च अदालत इस पर क्या रुख अख्तियार करता है। यह उसके अपने फैसले को पलटने का मामला भी है।
