अयोध्या में कुछ बदलेगा भी!

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चर्चा तो ऐसे हो रही है, जैसे अयोध्या में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा मिल कर सब कुछ बदल देने वाले हैं। ऐसा आभास दिया जा रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन की अब व्यवस्था पूरी तरह से बदल जाने वाली है। लेकिन क्या सचमुच ऐसा होगा? लग नहीं रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अब भी फैसले अगर चंपत राय की मर्जी के हिसाब से होंगे .या उनको खुश करने के लिए होंगे तो कैसे सब कुछ बदलेगा? यह वास्तविकता है कि चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है और उसे स्वीकार भी कर लिया गया है क्योंकि ट्रस्ट में ऐसी व्यवस्था है कि इस्तीफा होते ही उसे स्वीकार माना जाता है। यह बात छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में देश के जाने माने वकील और ट्रस्ट के सदस्य पाराशरन ने कहा थी। लेकिन यह भी वास्तविकता है कि चंपत राय अभी मंदिर प्रबंधन के काम से दूर नहीं हुए हैं।

चंपत राय अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भवन में रह रहे हैं। इतना ही नहीं जिन लोगों को नई व्यवस्था बनाने का जिम्मा सौंपा गया है वे उनसे सलाह मशविरा कर रहे हैं। ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन बुधवार को चंपत राय से मिलने ट्रस्ट भवन गए थे। उनके साथ कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी भी थे। दोनों ने करीब डेढ़ घंटे तक चंपत राय से बात की। ध्यान रहे गोविंद गिरी स्पष्ट कर चुके हैं कि वे चंपत राय को चढ़ावा चोरी के पूरे मामले में निर्दोष मानते हैं। ट्रस्ट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से लेकर उसके संचालन तक में चंपत राय की भूमिका के लिए उनका अभिनंदन किया गया है। ऐसे में यह उम्मीद बेमानी है कि गोविंद गिरी या कृष्ण मोहन कोई ऐसी व्यवस्था बनाएंगे, जिसमें चंपत राय या उनके लोगों की भागीदारी नहीं होगी। सबसे हैरानी की बात यह भी है कि बुधवार को ट्रस्ट भवन में कृष्ण मोहन, गोविंद गिरी और चंपत राय की जो बैठक हुई उस दौरान या उसके आसपास के समय में गोपाल राव भी वहां मौजूद थे। जानकार सूत्रों का कहना है कि वे भी किसी समय बैठक में शामिल हुए।

सोचें, चढ़ावा चोरी के मामले में चंपत राय और अनिल मिश्र के बाद तीसरा नाम ट्रस्ट  के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का आ रहा था। लेकिन नई व्यवस्था बनाने के लिए हो रही बैठक में वे भी शामिल हो रहे हैं। इस बीच यह खबर है कि मंगलवार और बुधवार को चंपत राय ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई बड़े लोगों से बात की है। असल में मंगलवार को उन्होंने जो चिट्ठी लिखी और रामचरितमानस की पंक्तियों के जरिए मित्रों की परख की बात कही तब से कहा जा रहा है कि उनके मित्र ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने चंपत राय को संयम रखने को कहा है। वैसे भी पहले से ही उनको पूरी तरह से बेकसूर बताने का प्रयास चल रहा था। अब वह प्रयास तेज हो गया है। कहा जा रहा है कि ट्रस्ट में कुछ महंतों की संख्या बढ़ाने पर विचार हो रहा है और एक सीईओ वाली व्यवस्था बनाने की भी बात हो रही है। लेकिन सबकी नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर रहेगी। उसमें बहुत संभावना है कि चंपत राय को क्लीन चिट मिल जाए। वैसे भी अयोध्या पुलिस की एफआईआर में उनका नाम नहीं है। इस बीच यह भी खबर है कि अयोध्या बार एसोसिएशन के जो वकील सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे थे और चंपत राय, अनिल मिश्र व गोपाल राव को अय़ोध्या से निकालने की मांग कर रहे थे। वे सब अब चुप होकर बैठ गए हैं। सो, धीरे धीरे सब कुछ पहले जैसा होने या पहले वाले लोगों के ही हाथ में रहने की ज्यादा संभावना है।


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