बंगाल जैसा एसआईआर विवाद पंजाब, दिल्ली में!

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देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का ऐलान हो गया है। अगले महीने से इसकी प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार पंजाब और दिल्ली नया पश्चिम बंगाल बनने वाले हैं। जिस तरह से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान विवाद हुआ वैसी ही तीव्रता का विवाद पंजाब और दिल्ली में हो सकता है। बंगाल में विवाद का कारण यह था कि वहां 27 फीसदी से ज्यादा आबादी मुस्लिम है और इलाका सीमावर्ती है, जहां बांग्लादेश से घुसपैठ की चर्चा दशकों से होती रही है। तभी दूसरे राज्यों के मुकाबले में बंगाल में विवाद ज्यादा हुआ। दूसरे राज्यों के मुकाबले बंगाल में तार्किक विसंगति को लेकर विवाद हुआ। इस श्रेणी में चुनाव आयोग ने 27 लाख से ज्यादा नाम डाल दिए और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इन कारणों के अलावा बंगाल में ज्यादा विवाद का एक कारण ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी थी। दोनों अब भी एसआईआऱ पर लड़ ही रहे हैं।

दिल्ली और पंजाब में विवाद का कारण अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी बनेगी। ध्यान रहे राजधानी दिल्ली में भी घुसपैठ का मुद्दा पुराना है। बंगाल के जैसी तो नहीं लेकिन दिल्ली में भी मुस्लिम आबादी बड़ी है। करीब 13 फीसदी मुस्लिम आबादी है और आधा दर्जन सीटें ऐसी हैं, जो पूरी तरह से मुस्लिम बहुलता वाली हैं। इनके अलावा एक दर्जन सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक होते हैं। सो, दिल्ली में भी एसआईआर में नाम कटते हैं या तार्किक विसंगति के आधार पर नाम रोके जाते हैं तो जैसे ममता बनर्जी लड़ती थीं वैसे केजरीवाल लड़ेंगे। पंजाब और दिल्ली दोनों जगह केजरीवाल अपने कोर वोट को बचाने का भरपूर प्रयास करेंगे। इस प्रयास में विवाद स्वाभाविक हैं। पंजाब में तो आप के साथ साथ कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल और नई बनी पार्टी वारिस पंजाब दे के बूथ लेवल एजेंट्स की तैयारी शुरू हो गई है। वहां भी एक एक नाम के लिए लड़ाई होगी।


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