समीक्षा के बाद मंत्रियों पर फैसला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में बड़ी फेरबदल कर सकते हैं। अगले महीने सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। अभी तक दो साल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मई के अंत तक या जून में बड़ा बदलाव हो सकता है। प्रधानमंत्री पांच देशों की यात्रा पर गए हैं। उनकी यात्रा अंतिम चरण में है। वे 20 मई को वापस लौटेंगे और 21 मई को मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई है। इस बार थोड़े अंतराल पर मंत्रिपरिषद की बैठक हो रही है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रियों से उनके मंत्रालय के कामकाज के बारे में बात करेंगे। वैसे सबकी रिपोर्ट उनको पहले मिल चुकी है। उस आधार पर मंत्रियों के कामकाज का आकलन कर लिया गया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कुछ मंत्रियों की विदाई तय है। यह भी कहा जा रहा है कि विदाई के कई पैमाने हैं। इनमें एक पैमाना कामकाज का भी है। यानी प्रधानमंत्री की उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाने या मंत्रालय की इमेज बहुत अच्छी नहीं बन पाने के आधार पर कुछ मंत्री विदा होंगे।

इसके अलावा एक कसौटी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। चुनावों के लिहाज से सामाजिक समीकरण को थोड़ा फाइन ट्यून किया जाएगा। हालांकि मोदी ने पहले ही अपनी सरकार में सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा है। याद करें कैसे उन्होंने संसद में अपने मंत्रियों का परिचय कराया था तो बताया था कि इसमें कितने ओबीसी और कितने एससी, एसटी हैं। मोदी सरकार और भाजपा का दावा है कि इससे पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में ओबीसी, एससी और एसटी मंत्री नहीं होते थे। इसके बावजूद राज्यों के चुनावों के हिसाब से सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन को फाइन ट्यून किया जाएगा।

ध्यान रहे अगले साल उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव है, जो भाजपा के लिए बहुत अहम है। 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। उसने लगभग आधी सीटें गंवा दी थी। तभी 2027 का चुनाव अहम होगा क्योंकि उसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी।

कामकाज और सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी के अलावा एक कसौटी उम्र, सक्रियता और राजनीतिक महत्व की भी होगी। नरेंद्र मोदी की मौजूदा सरकार में कई मंत्री हैं, जो अब 70 साल की सीमा पर पहुंच गए हैं या पार कर गए हैं। वे शारीरिक रूप से बहुत सक्षम नहीं हैं। उनके बारे में यह भी धारणा है कि सरकार की छवि बेहतर करने में उनका कोई योगदान नहीं है। उलटे उनकी वजह से नैरेटिव निगेटिव हो रहा है। सरकार को सोशल मीडिया में बन रही छवि का भी ध्यान रखना है। कई अलग अलग फैसलों या अपने बयानों या सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से कई मंत्री निशाने पर हैं। एकाध मंत्री तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ राइटविंग इकोसिस्टम ही पीछे पड़ा है।

कई मंत्री हैं, जो मोदी की तीनों सरकारों में रहे हैं और अब कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन तीन कसौटियों पर मंत्रियों की सूची बनी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि ऐसे नेताओं को सरकार में लाने की योजना है, जो आगे  10 साल तक काम कर सकें। जिस तरह राज्यों में नए चेहरों को आगे किया गया है उसी तरह से केंद्रीय राजनीति में भी भाजपा नए चेहरों को आगे करेगी। मोदी सरकार में और नितिन नबीन की संगठन की टीम में नए नेता लाए जाएंगे। मंत्रिमंडल और संगठन दोनों में फेरबदल से उसी तरह चौंकाया जा सकता है, जिस तरह नितिन नबीन के नाम से चौंकाया गया था।


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