भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने एक नेता के तौर पर राहुल गांधी की साख खराब करने का जो व्यवस्थित अभियान चलाया उसमें एक बात बार बार कही जाती है कि राहुल ही भाजपा के स्टार प्रचारक हैं। भाजपा नेताओं के साथ साथ अनेक प्रतिबद्ध पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक भी यह बात कहते हैं। चूंकि पिछले 12 साल से भाजपा ज्यादातर चुनाव जीत रही है और कांग्रेस हार रही है तो यह कहना सही भी प्रतीत होता है कि राहुल जहां जाते हैं वहां कांग्रेस हारती है। हालांकि पहले जब भारतीय जनसंघ या भाजपा कमजोर थी तब भी उस समय की भाजपा के बड़े नेताओं के नाम लेकर कहा जा सकता था कि वाजपेयी, आडवाणी या जोशी जहां जाते हैं वहां पार्टी हारती है और इसलिए वे लोग कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं। लेकिन तब राजनीति में विपक्ष को शत्रु की तरह नहीं देखा जाता था और चुनाव जीतना ही नेताओं का जीवन का लक्ष्य नहीं होता था।
बहरहाल, राहुल गांधी को भले भाजपा के नेता कुछ भी कहें लेकिन इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है कि भाजपा और उसकी सरकार जब भी किसी बडे संकट में फंसती है तो उसको समाधान राहुल गांधी में दिखता है। वह राहुल गांधी को ही संकटमोचन बनाती है। अभी केंद्र सरकार आर्थिक मसलों पर घिरी है। देश की अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। महंगाई बढ़नी शुरू हो गई है और इशके बावजूद गारंटी नहीं है कि सब चीजें सामान्य रहेंगी। इसके वैश्विक कारण हैं तो घरेलू कारण भी हैं। भाजपा ने पांच राज्यों के चुनावों की वजह से इस संकट को परदे की ओट दे रखी थी। अब वह ओट हट गई है। लोग भी समझने लगे हैं कि सरकार ने कैसे चुनाव के समय सब कुछ ठीक होने का दावा किया और कैसे अब संकट की घोषणा हो रही है और उससे निपटने का दिखावा भी हो रहा है। ऐसे समय में भी भाजपा को राहुल की याद आई है। तभी भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राहुल गांधी के विदेश दौरे के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सोचें, राहुल गांधी पिछले 22 साल में 54 बार विदेश गए हैं और इसमें एक अनुमान के मुताबिक 60 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, यह जानकारी लोगों को देने का क्या कारण है? यह कहना कि राहुल गांधी ने इन 22 सालों में 11 करोड़ रुपए की कमाई की लेकिन सिर्फ विदेश यात्रा पर 60 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, किस बात का इशारा है? यह बहुत एब्सर्ड और मूर्खतापूर्ण बातें हैं। सबको पता है कि सांसदों या नेताओं या सार्वजनिक जीवन में रहने वाले अन्य लोगों को बहुत तरह की सुविधाएं मिलती हैं। उनकी यात्राओं का खर्च पार्टियां या संगठन उठाते हैं। विदेश यात्राएं भी प्रायोजित होती हैं। जो मेजबानी करता है वह आने, जाने और ठहरने की व्यवस्था करता है। संबित पात्रा भी ये बातें जानते हैं। लेकिन सरकार को लोगों का ध्यान भटकाने और हेडलाइन मैनेज करने के लिए एक मुद्दा चाहिए था। सो, एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके संबित पात्रा ने ये राहुल की विदेश यात्राओं की जानकारी दी। ज्यादातर न्यूज चैनलों पर पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर डिबेट कराई गई और राहुल को कठघरे में खड़ा किया गया। पात्रा की तरह मीडिया के प्रतिबद्ध लोगों ने भी राहुल से सवाल पूछे। उनकी सुरक्षा में लगी एजेंसियों के हवाले भी कई बातें कही गईं। पिछले 12 साल में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सैकड़ों प्रेस कॉन्फ्रेंस हो चुकी है और भाजपा नेताओं की हजारों बाइट्स सोशल मीडिया में मिल जाएगी। लेकिन जाहिर है इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है इसलिए अभी तक कार्रवाई नहीं हो रही है। फिर भी इसका इस्तेमाल न्यूज साइकिल मैनेज किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह राहुल गांधी की उपयोगिता है।
