मंत्री तय करने में भाजपा क्यों देरी कर रही?

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भारतीय जनता पार्टी दो राज्यों में चुनाव जीती है और दोनों राज्यों में उसके मुख्यमंत्रियों ने शपथ ग्रहण कर ली है। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और असम में हिमंत बिस्वा सरमा सीएम बने हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री के साथ चुनिंदा मंत्रियों ने ही शपथ ली। पश्चिम बंगाल शुभेंदु के साथ दिलीप घोष, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू, निशीथ प्रमाणिक और अग्निमित्रा पॉल यानी पांच मंत्रियों ने शपथ ली। सोचें, राज्य में 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री सहित सिर्फ छह मंत्री बने हैं।

ऐसे ही असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ सिर्फ चार मंत्रियों ने शपथ ली। भाजपा के दो नेताओं रामेश्वर तेली और अजंता नियोग मंत्री बने हैं तो असम गण परिषद से अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट से चरण बोरा को शपथ दिलाई गई है। असम में 18 मंत्री बन सकते हैं। ऐसा नहीं है कि दोनों राज्यों में आनन फानन में सरकार बनी है। नतीजा आने के पांच दिन बाद बंगाल में और आठ दिन बाद असम में सरकार बनी है। असम में तो 10 साल से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। यह तीसरी लगातार सरकार बनी है। तभी भी इतने कम मंत्रियों के साथ शपथ हुई है। पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि असम में ज्यादातर चेहरे बदले जा सकते हैं। भाजपा अपने कोटे के मंत्रियों में बड़ी फेरबदल करेगी। इसलिए अभी कम मंत्री बनाए गए हैं। इसी तरह बंगाल में सारे नए मंत्री ही बनने हैं इसलिए वहां फैसला करने में देरी हो रही है। वैसे तमिलनाडु में भी 35 मंत्री बन सकते हैं लेकिन शपथ मुख्यमंत्री के साथ नौ मंत्रियों की ही हुई है।


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