भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने दिल्ली विधानसभा का 2025 का चुनाव अरविंद केजरीवाल की आम आदमी की छवि को ध्वस्त करके जीता। केजरीवाल ने अपने जीवन में संभवतः सबसे बड़ी गलती की थी दिल्ली में बड़ा बंगला बनाने की। उसकी पोल खुल गई और करोड़ों रुपए के खर्च का ब्योरा सामने आ गया। सो, भाजपा ने उसे शीशमहल का नाम देकर उसका खूब प्रचार किया। जैसे ही केजरीवाल की आम आदमी वाली छवि टूटी वैसे ही उनके व्यक्तित्व के ईर्द गिर्द बना सारा मिथक टूट गया। शराब नीति घोटाले की वजह से ईमानदारी का मिथक पहले ही टूट गया था।
बहरहाल, भाजपा अब उसी काठ की हांड़ी को दोबारा चढ़ाने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल एक राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं इस नाते उनको टाइप सात का एक बंगला आवंटित हुआ है। 95, लोधी इस्टेट का यह बंगला भी अदालत के आदेश पर मिला। भाजपा की सरकार ने तो बंगला भी आवंटित नहीं किया था। अब बंगला आवंटित हो गया तो दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा कह रहे हैं कि वह शीशमहल दो है। उन्होंने किसी बंगले के अंदर की कुछ तस्वीरें साझा की हैं। सोचें, भारतीय जनता पार्टी के नेता क्या चाहते हैं? क्या केजरीवाल अपने परिवार के साथ फुटपाथ पर रहें? या सरकारी घर को प्लास्टर वगैरह गिरा कर, कुछ खिड़की दरवाजे तोड़ कर, घास फूस उगा कर तब उसमें रहें तो दिल्ली के भाजपा नेताओं को संतोष होगा? केजरीवाल को जो घर आवंटित हुआ है वह किसी भी दूसरे सरकारी घर की तरह है। अपने घर में शिफ्ट करने से पहले सारे नेता कुछ न कुछ काम कराते हैं। लेकिन प्रवेश वर्मा उसको ऐसे दिखा रहे हैं, जैसे केजरीवाल का शीशमहल पार्ट दो दिखा कर वे दिल्ली का मुख्यमंत्री बन जाएंगे! आलोचना में भी रचनात्मकता की इतनी कमी है कि पूछिए मत!
