कांग्रेसीकरण से परेशान असम भाजपा के नेता

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने मास्टरस्ट्रोक के तौर पर भूपेन बोरा को पार्टी में शामिल कराया है। भूपेन बोरा तीन दशक से ज्यादा समय तक कांग्रेस में रहे। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे और संगठन के आदमी माने जाते हैं। उन्होंने सिर्फ कांग्रेस नहीं छोड़ी, बल्कि भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए यह बयान दिया कि असम कांग्रेस अब पूरी तरह से धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन के हाथ में है। इसके दो मकसद हैं। पहला तो कांग्रेस के खिलाफ लगने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को स्थापित करना और दूसरा, गौरव गोगोई के महत्व को कम करना। ध्यान रहे गौरव गोगोई अपने को अहोम अस्मिता के प्रतीक के तौर पर पेश करते हैं। अगर मतदाताओं के बीच यह मैसेज जाता है कि उनके ऊपर कांग्रेस आलाकमान की शह पाकर रकीबुल हुसैन ज्यादा प्रभावी हैं तो अहोम लोग नाराज होंगे।

बहरहाल, पता नहीं भाजपा का यह मास्टरस्ट्रोक चुनाव में कितना कामयाब होगा। लेकिन भूपेन बोरा के भाजपा में जाने के बाद से प्रदेश भाजपा के नेता पार्टी के कांग्रेसीकरण के रोना रो रहे हैं। वे परेशान हैं कि पार्टी में ज्यादातर महत्वपूर्ण पदों पर कांग्रेस से आए लोगों को बैठाया जा रहा है और इस चक्कर में भाजपा व संघ के पुराने लोगों की अनदेखी हो रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आने के साथ ही यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन पांच साल पहले जब वे मुख्यमंत्री बने तब इसमें तेजी आई। वे अपने साथ के तमाम पुराने कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करा रहे हैं। एक सौ से ज्यादा बड़े कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल हुए हैं, जिनमें भूपेन बोरा के अलावा राणा गोस्वामी जैसे नेता भी हैं। राणा गोस्वामी प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रहे थे। इनके अलावा पूर्व विधायक सुशांत बोरगोहेन भी हैं। भूपेन बोरा के साथ संजू बरूआ और सरबनारायण देउरी भी शामिल हुए हैं।


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