राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ेंगी

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राज्यसभा के दोवार्षिक चुनावों के पहले चऱण की घोषणा हो गई है। पहले चरण में 16 मार्च को 37 सीटों के लिए चुनाव होगा। इसके बाद मई में 28 सीटों का चुनाव होगा और फिर साल के अंत में नवंबर में 10 सीटों का चुनाव होगा। कुल मिला कर 75 सीटों पर इस साल चुनाव होना है। कम से कम पहले चरण की 37 सीटों में भारतीय जनता पार्टी को अच्छा खासा फायदा होने की संभावना है। अप्रैल में जो 37 सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव की घोषणा हुई है उनमें से भाजपा की सिर्फ नौ सीटें हैं। इस बार के चुनाव में उसे पांच से छह सीटों का फायदा होगा। भाजपा को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और बिहार में फायदा होगा। बाद के दो चरण के चुनावों में भाजपा का कोई खास फायदा नहीं होगा। साल के अंत में तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 10 सीटों के चुनाव हैं उसमें भाजपा को कुछ नुकसान ही होगा क्योंकि यूपी में समाजवादी पार्टी को दो सीट का फायदा हो सकता है।

बहरहाल, पहले चरण में भाजपा को छत्तीसगढ़ में एक सीट का फायदा होगा। वहां खाली हो रही दोनों सीटें कांग्रेस की हैं। फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी रिटायर हो रहे हैं। राज्य की 90 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा के 54 और कांग्रेस के 35 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 31 वोट की जरुरत है। सो, भाजपा और कांग्रेस दोनों को एक एक सीट मिल जाएगी। बिहार में भाजपा को दो सीट का फायदा हो सकता है। वहां पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिसमें से भाजपा की एक भी सीट नहीं है। 243 सदस्यों की विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरुरत है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू के दो सदस्य रिटायर हो रहे हैं और उसे अपने 85 विधायकों के दम पर दो सीटें मिल जाएंगी। भाजपा 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। उसे भी दो सीटें मिल जाएंगी। ध्यान रहे उसका कोई भी सदस्य रिटायर नहीं हो रहा है। इस तरह उसे दो सीटों का फायदा होगा। एक अन्य सहयोगी रालोमो के नेता उपेंद्र कुशवाहा रिटायर हो रहे हैं। इस पांचवीं सीट पर राजद की ओर से भी उम्मीदवार दिया जाएगा। इस पर चुनाव होगा और देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए सीट जीतने के लिए क्या करता है।

बिहार और छत्तीसगढ़ के अलावा भाजपा को महाराष्ट्र में बड़ा फायदा होगा। राज्य में सात सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से भाजपा की सिर्फ एक सीट है। उसके भागवत कराड रिटायर हो रहे हैं। ध्यान रहे 288 के सदन में भाजपा के अकेले 132 विधायक हैं। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 36 वोट की जरुरत है। इस तरह भाजपा अपने दम पर तीन सीट जीत सकती है। लेकिन ज्यादा संभावना इस बात की है कि वह एकनाथ शिंदे की शिव सेना और सुनेत्रा पवार की एनसीपी को एक एक सीट देगी और चार खुद लेगी। गठबंधन के पास 235 विधायक हैं इसलिए छह सीटें उसके खाते में जाएंगी। भाजपा अगर चार के कोटे में से एक सीट रामदास अठावले को देगी तब भी उसे दो सीटों का फायदा होगा। अगर शिंदे दूसरी सीट के लिए अड़ेंगे और भाजपा उनकी मांग मान लेगी तब भी उसे एक सीट का फायदा होगा। भाजपा को ओडिशा में भी फायदा होगा लेकिन वह फायदा संख्या में इसलिए नहीं दिखाई देगा क्योंकि बीजू जनता दल से पाला बदल कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों की ही फिर से वापसी की संभावना है। पश्चिम बंगाल में पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से एक सीट भाजपा के खाते में जाएगी। यह भाजपा का फायदा होगा क्योंकि खाली हो रही सीटों में से उसकी कोई सीट नहीं है। भाजपा को एक एक सीट का नुकसान हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में होगा।


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