दिल्ली की हवा योगी को जहरीली लगने लगी

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यह कमाल की बात है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की हवा को जहरीली बताया। उनको पता है कि दिल्ली में ट्रिपल इंजन की सरकार है। पुलिस और जमीन से लेकर प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के अधीन है तो राज्य का प्रशासन भाजपा की रेखा गुप्ता संभाल रही हें। दिल्ली नगर निगम में भी भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा जहरीली है, जिसमें उनका दम घुटने लगता है तो यह एक राजनीतिक बयान लगता है। किसी को कोई संशय नहीं रखना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ ने सचमुच दिल्ली के लोगों की समस्या को आवाज दी है। उनको इससे कोई मतलब नहीं है कि दिल्ली की हवा कितनी जहरीली है और दिल्ली के लोग इससे कितने परेशान हैं। उनको छायावादी अंदाज में एक मैसेज देना था।

ऐसा लग रहा है कि राजनीतिक कारणों से उनका दम घुट रहा है और दिल्ली का राजनीतिक वातावरण उनके प्रति जहरीला हो गया है, उसी को उन्होंने दिल्ली की हवा के जरिए व्यक्त किया। उन्होंने यह जोखिम लिया क्योंकि उनको पता है कि जब वे दिल्ली की हवा को जहरीला बताएंगे तो उनके अपने प्रदेश के कई शहरों खास कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा, गाजियाबाद, साहिबाबाद आदि के आंकड़े सामने आ जाएंगे। अगर दिल्ली में चार सौ एक्यूआई होता है तो नोएडा, गाजियाबाद आदि शहरों में इससे ज्यादा हो जाता है। वहां की हवा भी पूरी सर्दियों में जहरीली रही और लोगों का दम घुटता रहा। इसलिए निश्चित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की हवा को नहीं, बल्कि दिल्ली के राजनीतिक माहौल को दमघोंटू और जहरीला बताया है। क्या उनको लग रहा है कि यूजीसी के नियमों सहित कुछ और ऐसे काम हुए हैं, जिनसे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल बिगड़ा है? अगले कुछ दिनों के घटनाक्रम से इसका अंदाजा लगेगा। हालांकि यह भी तय है कि अगले साल का विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।


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