पन्नू केस में गुप्ता ने क्या स्वीकार किया?

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पता नहीं इस खबर से भारत सरकार की मुश्किल बढ़ेगी या कम होगी? आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू की अमेरिका में कथित तौर पर हत्या करने की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार निखिल गुप्ता ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने हत्या की साजिश, हत्या के लिए सुपारी देने और धनशोधन तीनों के आरोप कबूले हैं, जिसमें उसे 40 साल तक की सजा हो सकती है। ध्यान रहे निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था और वहां से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है। वह कहानी अलग फिल्मी है। गुप्ता ने अमेरिका में एक भाड़े के हत्यारे से संपर्क किया था और उसे पन्नू की हत्या की सुपारी दी थी। लेकिन वह भाड़े का हत्यारा अमेरिकी ड्रग इन्फोर्समेंट एजेंसी का एजेंट था। उसने सरकार को अलर्ट कर दिया और न सिर्फ प्लान फेल हुआ, बल्कि गुप्ता पकड़ा भी गया।

उस पूरी साजिश के पीछे भारत सरकार का हाथ होने की खबर थी। अमेरिकी एजेंसियों ने जो मुकदमा दर्ज किया उसमें कहा गया कि भारत सरकार का कोई अधिकारी था, जिसने निखिल गुप्ता को निर्देश दिए थे। सीसी-1 कोड नेम की बड़ी चर्चा हुई। अब गुप्ता ने गुनाह कबूल कर लिया है तो बड़ा सवाल है कि उसने क्या कबूल किया है? क्या उसने सारा दोष अपने ऊपर ले लिया है? अगर वह सारा दोष अपने ऊपर ले भी ले तो क्या अमेरिकी एजेंसियां और अदालतें इसे स्वीकार करेंगी? अमेरिकी एजेंसियां और सरकारें इसे तभी स्वीकार करेंगी, जब भारत सरकार के साथ किसी मसले पर सहमति बन गई होगी। अन्यथा मामला सही हो या गलत अमेरिका अपने हाथ में एक बारगेनिंग चिप की तरह इसको जरूर रखता ताकि भारत सरकार के ऊपर दबाव बना सके। ध्यान रहे इस मामले में भारत की खुफिया एजेंसी का भी नाम आ रहा था। इस वजह से अमेरिका के साथ भारत के संबंध बहुत बिगड़ गए थे। अमेरिका नाराज था कि भारत उसके यहां ऐसा कैसे कर सकता है।


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