व्यापार सौदे का धारावाहिक

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भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है या डेली सोप की तरह धारावाहिक शुरू किया है? हर दिन एक नया एपिसोड रिलीज हो रहा है। व्यापार सौदे की घोषणा के समय बताई गई बातों के अलावा डील की फ्रेमवर्क और फैक्टशीट के नाम पर तीन तरह के दस्तावेज लोगों के बीच उपलब्ध हैं। हर दिन चीजें बदल रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रोज सौदे में नई चीज जोड़ रहे हैं या घटा रहे हैं। तभी सवाल है कि ये सारी चीजें एक बार तय करके ही सौदे की घोषणा क्यों नहीं की गई? ध्यान रहे अभी भी सौदे पर दस्तखत नहीं हुए हैं। वह मार्च में होगा। इसकी टाइमलाइन देखेंगे तो और हैरानी होगी। पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की, फिर प्रधानमंत्री ने उसकी पुष्टि की, फिर वाणिज्य मंत्री ने संसद के बाहर और संसद के अंदर इस पर बयान दिया और उसके बाद साझा बयान जारी हुआ। साझा बयान जारी होने के बाद फिर डील की शर्तों में बदलाव हो गया।

इस बीच अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ भी दोपक्षीय व्यापार सौदा कर लिया। बांग्लादेश के साथ हुई संधि ने कपड़ा और वस्त्र के निर्यात में भारत को मिला एडवांटेज समाप्त कर दिया। उसके बाद ट्रंप ने भारत के साथ सौदे में तीन बदलाव किए। पहले सौदे में कहा गया था कि भारत पांच साल में पाच सौ अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इसके शब्दों में बदलाव करके कहा गया है कि भारत पांच सौ अरब डॉलर की सामान खरीदने का इरादा रखता है। इसी तरह अमेरिकी दालों को जीरो टैरिफ से बाहर कर दिया गया। साथ ही अमेरिकी कृषि उत्पादों की भारत में बिक्री का जिक्र भी हटा दिया गया। भारत में इसे लेकर नेतृत्व की बड़ी वाहवाही हो रही है। हालांकि इससे यह भी साफ होता है कि अभी सौदे की बातचीत चल रही है और अंतिम रूप से कुछ भी तय नहीं हुआ है। तभी इसकी टाइमिंग और हड़बड़ी में इसकी घोषणा पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही यह चिंता भी बढ़ रही है कि अंत में पता नहीं किस तरह का सौदा और शर्तें भारत के सामने होंगी।


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